Ekadashi Dates 2026 – 27

What is Ekadashi (एकादशी ) | Meaning
According to Hindu Mythology s the eleventh day or tithi of the shukla or krishna paksha of every month in the Hindu calendar. Ekadashi is also known as Gyaras.

Significance of Ekadashi
Ekadashi is measured as a time of immense power that’s why in Hindu mythology there is great importance of doing Lord Vishnu puja and vrat on Ekadashi. Also taking dip in Holy River is considered as washing out all your sins.

Ekadashi Fast Benefits (Vrat)
On Ekadashi day moon in fact nurture the subtle nerves and feelings of the heart so it’s very auspicious to keep fast on Ekadashi. Also visiting the Vishnu temple is very auspicious.

Ekadashi Calender 2026 | Dates of Ekadashi Days in 2026
Ekadashi falls twice in a month. Following are the Ekadashi dates for 2026:

27 May 2026 (Wednesday) Padmini Ekadashi 05:10 AM, 26 May – 06:21 AM, 27 May

11 June 2026 (Thursday) Parama Ekadashi 12:57 AM – 10:36 PM, 11 Jun

25 June 2026 (Thursday) Nirjala Ekadashi 06:12 PM, 24 Jun – 08:09 PM, 25 Jun

10 July 2026 (Friday) Vaishnav Yogini Ekadashi 08:16 AM, 10 Jul – 05:22 AM, 11 Jul

25 July 2026 (Saturday) Devshayani Ekadashi 09:12 AM, 24 Jul – 11:34 AM, 25 Jul

9 August 2026 (Sunday) Kamika Ekadashi 01:59 PM, 08 Aug – 11:04 AM, 09 Aug

23 August 2026 (Sunday) Vaishnav Shravana Putrada Ekadashi 02:00 AM, 23 Aug – 04:18 AM, 24 Aug

7 September 2026 (Monday) Aja Ekadashi 07:29 PM, 06 Sep – 05:03 PM, 07 Sep

22 September 2026 (Tuesday) Parivartini Ekadashi 08:00 PM, 21 Sep – 09:43 PM, 22 Sep

6 October 2026 (Tuesday) Indira Ekadashi 02:07 AM, 06 Oct – 12:34 AM, 07 Oct

22 October 2026 (Thursday) Papankusha Ekadashi 02:11 PM, 21 Oct – 02:47 PM, 22 Oct

5 November 2026 (Thursday) Rama Ekadashi 11:03 AM, 04 Nov – 10:35 AM, 05 Nov

20 November 2026 (Friday) Vaishnav Devutthana Ekadashi 07:15 AM, 20 Nov – 06:31 AM, 21 Nov

4 December 2026 (Friday) Utpanna Ekadashi 11:03 PM, 03 Dec – 11:44 PM, 04 Dec

20 December 2026 (Sunday) Vaikuntha Ekadashi 10:09 PM, 19 Dec – 08:14 PM, 20 Dec




Shri Badrinarayan Aarti

Shri Badrinarayan Aartiin Hindi/Sanskrit Lyrics

पवन मंद सुगन्ध शीतल हेम मन्दिर शोभितम् |

निकट गंगाबहत निर्मल श्रीबद्रीनाथ विश्वम्भरम् ||

शेष सुमरन करत निशदिन धरत ध्यान महेश्वर |

श्रीवेद ब्रह्मा करत  स्तुति श्रीबद्रीनाथ विश्वम्भरम् ||

शक्ति गौरी गणेश शारद मुनि  उच्चारणम् |

जोग ध्यान अपार लीला श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्

इन्द्र  चन्द्र कुबेर धुनिकर धूप दीप प्रकाशितम् |

सिद्धि मुनिजन करत जै जै  श्रीबद्रीनाथ विश्वम्भरम्

यक्ष कित्रर करत कौतुक ज्ञान गन्धर्व  प्रकाशितम्

श्रीलक्ष्मीकमला चँवरडोलें श्रीबद्रीनाथ विश्वम्भरम्

कैलाश  में एक देव निरंजन शैल शिखर महेश्वरम्

राजा युधिष्ठिर करत स्तुति  श्रीबद्रीनाथ विश्वम्भरम् |

कोटि तीरथ भवेत् पुण्यं प्राप्यते  फलदायकम् ||

How to chant Shri Badrinarayan Aarti

Benefits of Shri Badrinarayan Aarti

Shri Badrinarayan Aarti in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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श्री बद्रीनारायण जी की आरती

श्री बद्रीनारायण जी की आरती इन हिंदी लिरिक्स

पवन मंद सुगन्ध शीतल हेम मन्दिर शोभितम् |

निकट गंगाबहत निर्मल श्रीबद्रीनाथ विश्वम्भरम् ||

शेष सुमरन करत निशदिन धरत ध्यान महेश्वर |

श्रीवेद ब्रह्मा करत  स्तुति श्रीबद्रीनाथ विश्वम्भरम् ||

शक्ति गौरी गणेश शारद मुनि  उच्चारणम् |

जोग ध्यान अपार लीला श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्

इन्द्र  चन्द्र कुबेर धुनिकर धूप दीप प्रकाशितम् |

सिद्धि मुनिजन करत जै जै  श्रीबद्रीनाथ विश्वम्भरम्

यक्ष कित्रर करत कौतुक ज्ञान गन्धर्व  प्रकाशितम्

श्रीलक्ष्मीकमला चँवरडोलें श्रीबद्रीनाथ विश्वम्भरम्

कैलाश  में एक देव निरंजन शैल शिखर महेश्वरम्

राजा युधिष्ठिर करत स्तुति  श्रीबद्रीनाथ विश्वम्भरम् |

कोटि तीरथ भवेत् पुण्यं प्राप्यते  फलदायकम् ||

बद्रीनारायण जी की आरती का पाठ

बद्रीनारायण जी की आरती के लाभ

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नारायण सुक्तम

नारायण सुक्तम का पाठ

सहस्र शीर्षं देवं विश्वाक्षं विश्वशंभुवम् ।
विश्वै नारायणं देवं अक्षरं परमं पदम् ॥
विश्वतः परमान्नित्यं विश्वं नारायणं हरिम् ।
विश्वं एव इदं पुरुषः तद्विश्वं उपजीवति ॥
पतिं विश्वस्य आत्मा ईश्वरं शाश्वतं शिवमच्युतम् ।
नारायणं महाज्ञेयं विश्वात्मानं परायणम् ॥
नारायण परो ज्योतिरात्मा नारायणः परः ।
नारायण परं ब्रह्म तत्त्वं नारायणः परः ।
नारायण परो ध्याता ध्यानं नारायणः परः ॥
यच्च किंचित् जगत् सर्वं दृश्यते श्रूयतेऽपि वा ।
अंतर्बहिश्च तत्सर्वं व्याप्य नारायणः स्थितः ॥
अनन्तं अव्ययं कविं समुद्रेन्तं विश्वशंभुवम् ।
पद्म कोश प्रतीकाशं हृदयं च अपि अधोमुखम् ॥
अधो निष्ठ्या वितस्त्यान्ते नाभ्याम् उपरि तिष्ठति ।
ज्वालामालाकुलं भाती विश्वस्यायतनं महत् ॥
सन्ततं शिलाभिस्तु लम्बत्या कोशसन्निभम् ।
तस्यान्ते सुषिरं सूक्ष्मं तस्मिन् सर्वं प्रतिष्ठितम् ॥
तस्य मध्ये महानग्निः विश्वार्चिः विश्वतो मुखः ।
सोऽग्रविभजंतिष्ठन् आहारं अजरः कविः ॥
तिर्यगूर्ध्वमधश्शायी रश्मयः तस्य सन्तता ।
सन्तापयति स्वं देहमापादतलमास्तकः ।
तस्य मध्ये वह्निशिखा अणीयोर्ध्वा व्यवस्थिताः ॥
नीलतोयद-मध्यस्थ-द्विद्युल्लेखेव भास्वरा ।
नीवारशूकवत्तन्वी पीता भास्वत्यणूपमा ॥
तस्याः शिखाया मध्ये परमात्मा व्यवस्थितः ।
स ब्रह्म स शिवः स हरिः स इन्द्रः सोऽक्षरः परमः स्वराट् ॥
ऋतं सत्यं परं ब्रह्म पुरुषं कृष्ण पिङ्गलम् ।
ऊर्ध्वरेतं विरूपाक्षं विश्वरूपाय वै नमो नमः ॥

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि ।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥

ॐ शांति शांति शांतिः ॥

नारायण सुक्तम के लाभ

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Brihaspativar Vrat Katha

Brihaspativar Vrat Katha | Meaning, Benefits & Spiritual Importance

What is Brihaspativar Vrat Katha?

Brihaspativar Vrat Katha is a sacred Hindu fasting story associated with Thursday worship dedicated to Lord Vishnu and Brihaspati Dev.

Devotees observe this vrat to seek prosperity, wisdom, peace, family happiness, and spiritual blessings.

The vrat katha is traditionally read during Thursday fasting rituals and is considered highly auspicious in Hindu households.

Guruvar Vrat Katha in Hindi

प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक बड़ा व्यापारी रहता था। वह जहाजों में माल लदवाकर दूसरे देशों में भेजा करता था। वह जिस प्रकार अधिक धन कमाता था उसी प्रकार जी खोलकर दान भी करता था, परंतु उसकी पत्नी अत्यंत कंजूस थी। वह किसी को एक दमड़ी भी नहीं देने देती थी।
एक बार सेठ जब दूसरे देश व्यापार करने गया तो पीछे से बृहस्पतिदेव ने साधु-वेश में उसकी पत्नी से भिक्षा मांगी। व्यापारी की पत्नी बृहस्पतिदेव से बोली हे साधु महाराज, मैं इस दान और पुण्य से तंग आ गई हूं। आप कोई ऐसा उपाय बताएं, जिससे मेरा सारा धन नष्ट हो जाए और मैं आराम से रह सकूं। मैं यह धन लुटता हुआ नहीं देख सकती।
बृहस्पतिदेव ने कहा, हे देवी, तुम बड़ी विचित्र हो, संतान और धन से कोई दुखी होता है। अगर अधिक धन है तो इसे शुभ कार्यों में लगाओ, कुंवारी कन्याओं का विवाह कराओ, विद्यालय और बाग-बगीचों का निर्माण कराओ। ऐसे पुण्य कार्य करने से तुम्हारा लोक-परलोक सार्थक हो सकता है, परन्तु साधु की इन बातों से व्यापारी की पत्नी को ख़ुशी नहीं हुई। उसने कहा- मुझे ऐसे धन की आवश्यकता नहीं है, जिसे मैं दान दूं।
तब बृहस्पतिदेव बोले “यदि तुम्हारी ऐसी इच्छा है तो तुम एक उपाय करना। सात बृहस्पतिवार घर को गोबर से लीपना, अपने केशों को पीली मिटटी से धोना, केशों को धोते समय स्नान करना, व्यापारी से हजामत बनाने को कहना, भोजन में मांस-मदिरा खाना, कपड़े अपने घर धोना। ऐसा करने से तुम्हारा सारा धन नष्ट हो जाएगा। इतना कहकर बृहस्पतिदेव अंतर्ध्यान हो गए।
व्यापारी की पत्नी ने बृहस्पति देव के कहे अनुसार सात बृहस्पतिवार वैसा ही करने का निश्चय किया। केवल तीन बृहस्पतिवार बीते थे कि उसी समस्त धन-संपत्ति नष्ट हो गई और वह परलोक सिधार गई। जब व्यापारी वापस आया तो उसने देखा कि उसका सब कुछ नष्ट हो चुका है। उस व्यापारी ने अपनी पुत्री को सांत्वना दी और दूसरे नगर में जाकर बस गया। वहां वह जंगल से लकड़ी काटकर लाता और शहर में बेचता। इस तरह वह अपना जीवन व्यतीत करने लगा।
एक दिन उसकी पुत्री ने दही खाने की इच्छा प्रकट की लेकिन व्यापारी के पास दही खरीदने के पैसे नहीं थे। वह अपनी पुत्री को आश्वासन देकर जंगल में लकड़ी काटने चला गया। वहां एक वृक्ष के नीचे बैठ अपनी पूर्व दशा पर विचार कर रोने लगा। उस दिन बृहस्पतिवार था। तभी वहां बृहस्पतिदेव साधु के रूप में सेठ के पास आए और बोले “हे मनुष्य, तू इस जंगल में किस चिंता में बैठा है?”
तब व्यापारी बोला “हे महाराज, आप सब कुछ जानते हैं।” इतना कहकर व्यापारी अपनी कहानी सुनाकर रो पड़ा। बृहस्पतिदेव बोले “देखो बेटा, तुम्हारी पत्नी ने बृहस्पति देव का अपमान किया था इसी कारण तुम्हारा यह हाल हुआ है लेकिन अब तुम किसी प्रकार की चिंता मत करो। तुम गुरुवार के दिन बृहस्पतिदेव का पाठ करो। दो पैसे के चने और गुड़ को लेकर जल के लोटे में शक्कर डालकर वह अमृत और प्रसाद अपने परिवार के सदस्यों और कथा सुनने वालों में बांट दो। स्वयं भी प्रसाद और चरणामृत लो। भगवान तुम्हारा अवश्य कल्याण करेंगे।”
साधु की बात सुनकर व्यापारी बोला “महाराज। मुझे तो इतना भी नहीं बचता कि मैं अपनी पुत्री को दही लाकर दे सकूं।” इस पर साधु जी बोले “तुम लकड़ियां शहर में बेचने जाना, तुम्हें लकड़ियों के दाम पहले से चौगुने मिलेंगे, जिससे तुम्हारे सारे कार्य सिद्ध हो जाएंगे।”
लकड़हारे ने लकड़ियां काटीं और शहर में बेचने के लिए चल पड़ा। उसकी लकड़ियां अच्छे दाम में बिक गई जिससे उसने अपनी पुत्री के लिए दही लिया और गुरुवार की कथा हेतु चना, गुड़ लेकर कथा की और प्रसाद बांटकर स्वयं भी खाया। उसी दिन से उसकी सभी कठिनाइयां दूर होने लगीं, परंतु अगले बृहस्पतिवार को वह कथा करना भूल गया।
अगले दिन वहां के राजा ने एक बड़े यज्ञ का आयोजन कर पूरे नगर के लोगों के लिए भोज का आयोजन किया। राजा की आज्ञा अनुसार पूरा नगर राजा के महल में भोज करने गया। लेकिन व्यापारी व उसकी पुत्री तनिक विलंब से पहुंचे, अत: उन दोनों को राजा ने महल में ले जाकर भोजन कराया। जब वे दोनों लौटकर आए तब रानी ने देखा कि उसका खूंटी पर टंगा हार गायब है। रानी को व्यापारी और उसकी पुत्री पर संदेह हुआ कि उसका हार उन दोनों ने ही चुराया है। राजा की आज्ञा से उन दोनों को कारावास की कोठरी में कैद कर दिया गया। कैद में पड़कर दोनों अत्यंत दुखी हुए। वहां उन्होंने बृहस्पति देवता का स्मरण किया। बृहस्पति देव ने प्रकट होकर व्यापारी को उसकी भूल का आभास कराया और उन्हें सलाह दी कि गुरुवार के दिन कैदखाने के दरवाजे पर तुम्हें दो पैसे मिलेंगे उनसे तुम चने और मुनक्का मंगवाकर विधिपूर्वक बृहस्पति देवता का पूजन करना। तुम्हारे सब दुख दूर हो जाएंगे।
बृहस्पतिवार को कैदखाने के द्वार पर उन्हें दो पैसे मिले। बाहर सड़क पर एक स्त्री जा रही थी। व्यापारी ने उसे बुलाकार गुड़ और चने लाने को कहा। इसपर वह स्त्री बोली “मैं अपनी बहू के लिए गहने लेने जा रही हूं, मेरे पास समय नहीं है।” इतना कहकर वह चली गई। थोड़ी देर बाद वहां से एक और स्त्री निकली, व्यापारी ने उसे बुलाकर कहा कि हे बहन मुझे बृहस्पतिवार की कथा करनी है। तुम मुझे दो पैसे का गुड़-चना ला दो।
बृहस्पतिदेव का नाम सुनकर वह स्त्री बोली “भाई, मैं तुम्हें अभी गुड़-चना लाकर देती हूं। मेरा इकलौता पुत्र मर गया है, मैं उसके लिए कफन लेने जा रही थी लेकिन मैं पहले तुम्हारा काम करूंगी, उसके बाद अपने पुत्र के लिए कफन लाऊंगी।”
वह स्त्री बाजार से व्यापारी के लिए गुड़-चना ले आई और स्वयं भी बृहस्पतिदेव की कथा सुनी। कथा के समाप्त होने पर वह स्त्री कफन लेकर अपने घर गई। घर पर लोग उसके पुत्र की लाश को “राम नाम सत्य है” कहते हुए श्मशान ले जाने की तैयारी कर रहे थे। स्त्री बोली “मुझे अपने लड़के का मुख देख लेने दो।” अपने पुत्र का मुख देखकर उस स्त्री ने उसके मुंह में प्रसाद और चरणामृत डाला। प्रसाद और चरणामृत के प्रभाव से वह पुन: जीवित हो गया।
पहली स्त्री जिसने बृहस्पतिदेव का निरादर किया था, वह जब अपने पुत्र के विवाह हेतु पुत्रवधू के लिए गहने लेकर लौटी और जैसे ही उसका पुत्र घोड़ी पर बैठकर निकला वैसे ही घोड़ी ने ऐसी उछाल मारी कि वह घोड़ी से गिरकर मर गया। यह देख स्त्री रो-रोकर बृहस्पति देव से क्षमा याचना करने लगी।
उस स्त्री की याचना से बृहस्पतिदेव साधु वेश में वहां पहुंचकर कहने लगे “देवी। तुम्हें अधिक विलाप करने की आवश्यकता नहीं है। यह बृहस्पतिदेव का अनादार करने के कारण हुआ है। तुम वापस जाकर मेरे भक्त से क्षमा मांगकर कथा सुनो, तब ही तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी।”
जेल में जाकर उस स्त्री ने व्यापारी से माफी मांगी और कथा सुनी। कथा के उपरांत वह प्रसाद और चरणामृत लेकर अपने घर वापस गई। घर आकर उसने चरणामृत अपने मृत पुत्र के मुख में डाला| चरणामृत के प्रभाव से उसका पुत्र भी जीवित हो उठा। उसी रात बृहस्पतिदेव राजा के सपने में आए और बोले “हे राजन। तूने जिस व्यापारी और उसके पुत्री को जेल में कैद कर रखा है वह बिलकुल निर्दोष हैं। तुम्हारी रानी का हार वहीं खूंटी पर टंगा है।”
दिन निकला तो राजा रानी ने हार खूंटी पर लटका हुआ देखा। राजा ने उस व्यापारी और उसकी पुत्री को रिहा कर दिया और उन्हें आधा राज्य देकर उसकी पुत्री का विवाह उच्च कुल में करवाकर दहेज़ में हीरे-जवाहरात दिए।

Spiritual Significance of Brihaspativar Vrat

Thursday, also known as Guruvar or Brihaspativar, is spiritually associated with wisdom, positivity, knowledge, and divine blessings.

The vrat is believed to help devotees:

Strengthen faith and devotion
Bring prosperity and harmony
Improve positivity and spiritual discipline
Receive blessings from Lord Vishnu
Create peace and stability in life

Benefits of Brihaspativar Vrat

1. Brings Prosperity and Positivity

Devotees believe the vrat attracts spiritual and material prosperity.

2. Helps Improve Family Harmony

The vrat is commonly observed for peace and happiness in the family.

3. Strengthens Spiritual Discipline

Regular fasting and prayer help develop devotion and spiritual focus.

4. Promotes Mental Peace

Many devotees feel calmness and positivity after observing the vrat.

5. Enhances Devotional Worship

Thursday worship strengthens connection with Lord Vishnu and Brihaspati Dev.

Brihaspativar Vrat Puja Vidhi

Simple Thursday Vrat Method
Wake up early and take a bath
Wear yellow clothes if possible
Worship Lord Vishnu or Brihaspati Dev
Offer yellow flowers, bananas, turmeric, and sweets
Read Brihaspativar Vrat Katha
Chant Vishnu or Brihaspati mantras
Perform aarti and distribute prasad

Best Time to Observe Brihaspativar Vrat katha

The vrat is commonly observed:

Every Thursday
During Guru Pushya Yoga
For spiritual growth and positivity
During difficult life situations
For marriage and family well-being prayers

Brihaspativar Vrat PDF

Many devotees prefer downloading Brihaspativar Vrat Katha PDF versions for offline reading and weekly Thursday worship.

Frequently Asked Questions (FAQ)

1. What is Brihaspativar Vrat Katha?

It is a sacred Hindu fasting story associated with Thursday worship dedicated to Lord Vishnu and Brihaspati Dev.

2. What are the benefits of Brihaspativar Vrat?

Devotees believe it brings prosperity, peace, positivity, wisdom, and spiritual blessings.

3. When is Brihaspativar Vrat observed?

It is observed every Thursday.

4. Can Brihaspativar Vrat be observed by women?

Yes, both men and women can observe the vrat.

5. What should be offered during Brihaspativar Puja?

Yellow flowers, bananas, turmeric, sweets, and yellow clothes are commonly offered.

6. Is Brihaspativar Vrat related to Lord Vishnu?

Yes, Thursday worship is strongly associated with Lord Vishnu.

7. Can Brihaspativar Vrat be observed for marriage and family happiness?

Many devotees observe this vrat for marriage blessings and family harmony.

8. Where can I download Brihaspativar Vrat Katha PDF?

Many devotional websites provide downloadable PDF versions.

9. What food is eaten during Thursday fast?

Devotees usually eat simple sattvic food and avoid certain items according to family traditions.

10. Is yellow color important in Brihaspativar Vrat?

Yes, yellow is considered auspicious for Thursday worship and Brihaspati Dev.

11. How long does Brihaspativar Puja take?

The puja and katha usually take around 30 to 60 minutes.

12. Can Brihaspativar Vrat be observed every week?

Yes, many devotees observe the vrat regularly every Thursday.

Brihaspati Vrat Katha in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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Download Brihaspati Vrat Katha in Hindi PDF

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Pitar Chalisa in Bengali PDF

পিত্র চালিসার আধ্যাত্মিক তাৎপর্য: পূর্বপুরুষদের আচার ও আশীর্বাদ

পিত্র চালিসা একটি ভক্তিমূলক পাঠ্য যা হিন্দুধর্মের পূর্বপুরুষদের (পিত্রদের) উদ্দেশ্যে নিবেদিত। এটি একজনের পূর্বপুরুষদের আত্মাকে সম্মান জানাতে এবং তাদের কাছ থেকে আশীর্বাদ পাওয়ার জন্য পঠিত হয়, যারা পরিবারের আধ্যাত্মিক এবং বস্তুগত সুস্থতায় গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করে বলে বিশ্বাস করা হয়। এই পোস্টটি পিত্র চালিসার গুরুত্ব, এর উপকারিতা, এর সাথে সম্পর্কিত আচার এবং এর পালনের জন্য শুভ তারিখ এবং মুহুর্ত সহ নির্দিষ্ট বিবরণ ব্যাখ্যা করে।

বাংলায় পিতর চালিসা

।। दोहा ।।

हे पितरेश्वर आपको दे दियो आशीर्वाद
चरणाशीश नवा दियो रखदो सिर पर हाथ
सबसे पहले गणपत पाछे घर का देव मनावा जी
हे पितरेश्वर दया राखियो, करियो मन की चाया जी ।।

।। चौपाई ।।

पितरेश्वर करो मार्ग उजागर
चरण रज की मुक्ति सागर

परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा
मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा

मातृ-पितृ देव मन जो भावे
सोई अमित जीवन फल पावे

जै-जै-जै पित्तर जी साईं
पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं

चारों ओर प्रताप तुम्हारा
संकट में तेरा ही सहारा

नारायण आधार सृष्टि का
पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का

प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते
भाग्य द्वार आप ही खुलवाते

झुंझनू में दरबार है साजे
सब देवों संग आप विराजे

प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा
कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा

पित्तर महिमा सबसे न्यारी
जिसका गुणगावे नर नारी

तीन मण्ड में आप बिराजे
बसु रुद्र आदित्य में साजे

नाथ सकल संपदा तुम्हारी
मैं सेवक समेत सुत नारी

छप्पन भोग नहीं हैं भाते
शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते

तुम्हारे भजन परम हितकारी
छोटे बड़े सभी अधिकारी

भानु उदय संग आप पुजावै
पांच अँजुलि जल रिझावे

ध्वज पताका मण्ड पे है साजे
अखण्ड ज्योति में आप विराजे

सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी
धन्य हुई जन्म भूमि हमारी

शहीद हमारे यहाँ पुजाते
मातृ भक्ति संदेश सुनाते

जगत पित्तरो सिद्धान्त हमारा
धर्म जाति का नहीं है नारा

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
सब पूजे पित्तर भाई

हिन्दू वंश वृक्ष है हमारा
जान से ज्यादा हमको प्यारा

गंगा ये मरुप्रदेश की
पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की

बन्धु छोड़ ना इनके चरणाँ
इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा

चौदस को जागरण करवाते
अमावस को हम धोक लगाते

जात जडूला सभी मनाते
नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते

धन्य जन्म भूमि का वो फूल है
जिसे पितृ मण्डल की मिली धूल है

श्री पित्तर जी भक्त हितकारी
सुन लीजे प्रभु अरज हमारी

निशिदिन ध्यान धरे जो कोई
ता सम भक्त और नहीं कोई

तुम अनाथ के नाथ सहाई
दीनन के हो तुम सदा सहाई

चारिक वेद प्रभु के साखी
तुम भक्तन की लज्जा राखी

नाम तुम्हारो लेत जो कोई
ता सम धन्य और नहीं कोई

जो तुम्हारे नित पाँव पलोटत
नवों सिद्धि चरणा में लोटत

सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी
जो तुम पे जावे बलिहारी

जो तुम्हारे चरणा चित्त लावे
ताकी मुक्ति अवसी हो जावे

सत्य भजन तुम्हारो जो गावे
सो निश्चय चारों फल पावे

तुमहिं देव कुलदेव हमारे
तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे

सत्य आस मन में जो होई
मनवांछित फल पावें सोई

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई
शेष सहस्र मुख सके न गाई

मैं अतिदीन मलीन दुखारी
करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी

अब पित्तर जी दया दीन पर कीजै
अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै

।। दोहा ।।

पित्तरों को स्थान दो, तीरथ और स्वयं ग्राम
श्रद्धा सुमन चढ़ें वहां, पूरण हो सब काम

झुंझनू धाम विराजे हैं, पित्तर हमारे महान
दर्शन से जीवन सफल हो, पूजे सकल जहान

जीवन सफल जो चाहिए, चले झुंझनू धाम
पित्तर चरण की धूल ले, हो जीवन सफल महान

/ इति पितर चालीसा समाप्त /

পিত্র চালিসার গুরুত্ব

হিন্দু বিশ্বাসে, পূর্বপুরুষরা একটি শ্রদ্ধার স্থান ধারণ করে এবং তাদের আশীর্বাদকে একটি সমৃদ্ধ এবং বাধা-মুক্ত জীবনের জন্য অপরিহার্য বলে মনে করা হয়। পিত্র চালিসা হল একটি শক্তিশালী আধ্যাত্মিক হাতিয়ার যা পৈতৃক রাজ্যের সাথে সংযোগ স্থাপন, সুসংগত পারিবারিক জীবন এবং আধ্যাত্মিক বৃদ্ধির প্রচার করে। এটি কৃতজ্ঞতা প্রকাশ করার এবং পূর্বপুরুষদের কাছ থেকে নির্দেশনা চাওয়ার একটি রূপ, যার ফলে বাড়িতে তাদের অব্যাহত আশীর্বাদ নিশ্চিত করা হয়।

পিত্র চালিসা পাঠের উপকারিতা

আধ্যাত্মিক সংযোগ: জীবিত পরিবারের সদস্যদের এবং তাদের পূর্বপুরুষদের মধ্যে বন্ধনকে শক্তিশালী করে, ইতিবাচক শক্তির স্থির প্রবাহ নিশ্চিত করে।
পূর্বপুরুষের কর্ম থেকে সুরক্ষা: বর্তমান পরিবারের সদস্যদের উপর পূর্বপুরুষদের অতীত কর্ম্ম ঋণের প্রভাব কমাতে সাহায্য করে।
সম্প্রীতি ও সমৃদ্ধি: নিয়মিত পাঠ করলে পূর্বপুরুষদের খুশি করে পরিবারে সৌহার্দ্য, সুখ ও সমৃদ্ধি আসতে পারে।

পূর্বপুরুষদের জন্য আচার অনুষ্ঠান

পিত্র চালিসা সাধারণত পিতৃপক্ষের সময় পাঠ করা হয়, সেই সময়কালে যখন হিন্দুরা তাদের পূর্বপুরুষদের শ্রদ্ধা জানায়। আচারের মধ্যে রয়েছে:
তর্পণ: পূর্বপুরুষদের আত্মাকে সন্তুষ্ট করতে জলে কালো তিল মিশিয়ে তর্পণ নিবেদন করা উচিত।
শ্রাদ্ধ: পিন্ড দান (চালের বল নিবেদন) এবং ব্রাহ্মণদের খাবারের অন্তর্ভুক্ত অনুষ্ঠান সম্পাদন করা।
পিত্র চালিসা পাঠ: মৃত পূর্বপুরুষদের ফটোগ্রাফ বা প্রতীকী উপস্থাপনা দিয়ে করা হয়।
পিত্র স্তোত্র পাঠ: 

পিতৃপক্ষ 2026 তারিখ এবং সময়

পূর্বপুরুষদের আশীর্বাদ। পূর্বপুরুষের কাজ

পিতৃ স্তোত্র

পিতর আরতি

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Vishnu Mantra

Vishnu Mantra | Meaning, Benefits & Spiritual Importance

What is Vishnu Mantra?

Vishnu Mantra is a sacred devotional chant dedicated to Lord Vishnu, the preserver and protector in Hinduism.

Devotees chant Vishnu Mantras for peace, positivity, spiritual growth, protection, and divine blessings.

Some of the most popular Vishnu Mantras include:

“Om Namo Narayanaya”
“Om Namo Bhagavate Vasudevaya”
Vishnu Gayatri Mantra

These mantras are widely recited during Vishnu worship, meditation, Ekadashi fasting, and spiritual practice.

Vishnu Mantra in Hindi/Sanskrit Lyrics

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं

विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम् ।

लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्

वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥

Vishnu Mool Mantra in Hindi/Sanskrit Lyrics

ॐ नमो नारायणाय।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

Spiritual Significance of Vishnu Mantra

Lord Vishnu is worshipped as the protector and sustainer of the universe.

Vishnu Mantras are spiritually important because devotees believe they:

Bring peace and positivity
Strengthen devotion and faith
Create mental calmness
Promote spiritual growth
Help remove negativity and fear

Benefits of Chanting Vishnu Mantra

1. Brings Mental Peace

Regular chanting helps devotees feel emotionally calm and spiritually balanced.

2. Enhances Spiritual Growth

The mantra strengthens meditation, devotion, and inner awareness.

3. Creates Positive Energy

Many devotees believe Vishnu Mantras create spiritual positivity and harmony.

4. Helps During Difficult Times

Devotees chant Vishnu Mantras for courage, faith, and divine support.

5. Strengthens Devotion

Chanting helps deepen connection with Lord Vishnu.

Best Time to Chant Vishnu Mantra

The most auspicious times include:

Early morning
During meditation
On Thursdays
During Ekadashi
During Vishnu Puja and bhajans
Popular Vishnu Mantras
Om Namo Narayanaya

One of the most powerful and widely chanted Vishnu mantras.

Om Namo Bhagavate Vasudevaya

A sacred mantra associated with surrender and devotion to Lord Vishnu.

Vishnu Gayatri Mantra

Commonly used during meditation and spiritual practice.

Vishnu Mantra PDF Download

Many devotees search for Vishnu Mantra PDF versions for:

Daily chanting
Temple worship
Offline reading
Spiritual study
Meditation practice

Frequently Asked Questions (FAQ)

1. What is Vishnu Mantra?

Vishnu Mantra is a sacred devotional chant dedicated to Lord Vishnu.

2. What are the benefits of chanting Vishnu Mantra?

Devotees believe it brings peace, positivity, spiritual strength, and mental calmness.

3. Which is the most powerful Vishnu Mantra?

“Om Namo Narayanaya” is considered one of the most powerful Vishnu mantras.

4. Can Vishnu Mantra be chanted daily?

Yes, many devotees chant Vishnu Mantras daily during prayer and meditation.

5. When should Vishnu Mantra be chanted?

It is commonly chanted in the morning, during meditation, and on Thursdays or Ekadashi.

6. Is Vishnu Mantra related to Narayana?

Yes, Narayana is another sacred name of Lord Vishnu.

7. Can women chant Vishnu Mantra?

Yes, both men and women can chant Vishnu Mantras.

8. Does Vishnu Mantra help reduce stress?

Many devotees believe regular chanting helps create calmness and emotional balance.

9. Where can I download Vishnu Mantra PDF?

Many devotional websites provide downloadable PDF versions.

10. Is Vishnu Mantra good for meditation?

Yes, Vishnu Mantras are widely used during meditation and spiritual practice.

11. How long does Vishnu Mantra chanting take?

It usually takes around 5 to 20 minutes depending on repetition and chanting style.

12. Can students chant Vishnu Mantra?

Yes, students and devotees chant Vishnu Mantras for positivity, focus, and spiritual confidence.

Vishnu Mantra in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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विष्णु मंत्र

विष्णु मंत्र | भगवान विष्णु के शक्तिशाली मंत्र और उनका महत्व

विष्णु मंत्र क्या है?

विष्णु मंत्र भगवान भगवान विष्णु को समर्पित पवित्र मंत्र हैं, जिनका जाप मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए किया जाता है।

हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को जगत का पालनहार माना जाता है। भक्त विष्णु मंत्रों का जाप सुख, समृद्धि, शांति और ईश्वर की कृपा प्राप्त करने के लिए करते हैं।

सबसे लोकप्रिय विष्णु मंत्रों में शामिल हैं:

“ॐ नमो नारायणाय”
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
विष्णु गायत्री मंत्र

विष्णु मंत्र इन हिंदी लिरिक्स

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं

विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम् ।

लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्

वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥

विष्णु मूल मंत्र इन हिंदी लिरिक्स

ॐ नमो नारायणाय।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

विष्णु गायत्री मंत्र इन हिंदी लिरिक्स

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि।तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

विष्णु मंत्र का धार्मिक महत्व

भगवान विष्णु की उपासना हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। विष्णु मंत्रों का जाप:

मानसिक शांति देता है
सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है
भक्ति और श्रद्धा मजबूत करता है
तनाव और भय कम करने में सहायक माना जाता है
आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाता है

विष्णु मंत्र जाप के लाभ

1. मानसिक शांति प्राप्त होती है

नियमित जाप मन को शांत और स्थिर रखने में सहायक माना जाता है।

2. सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है

भक्तों के अनुसार विष्णु मंत्र घर और मन में सकारात्मकता लाते हैं।

3. आध्यात्मिक उन्नति होती है

विष्णु मंत्र ध्यान और आत्मिक विकास में सहायक माने जाते हैं।

4. भय और चिंता कम होती है

कई श्रद्धालु कठिन समय में विष्णु मंत्रों का जाप करते हैं।

5. भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है

भगवान विष्णु की भक्ति को धर्म और मोक्ष का मार्ग माना जाता है।

विष्णु मंत्र कब जपना चाहिए?

सबसे शुभ समय:

सुबह स्नान के बाद
गुरुवार
एकादशी
ध्यान और पूजा के समय
विष्णु पूजा और भजन के दौरान

सबसे प्रसिद्ध विष्णु मंत्र

ॐ नमो नारायणाय

यह भगवान विष्णु का अत्यंत लोकप्रिय मंत्र है।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

यह मंत्र आध्यात्मिक शांति और भक्ति के लिए प्रसिद्ध है।

विष्णु गायत्री मंत्र

ध्यान और आध्यात्मिक साधना में प्रयोग किया जाने वाला महत्वपूर्ण मंत्र।

Vishnu Mantra PDF

कई भक्त दैनिक जाप और पूजा के लिए Vishnu Mantra PDF डाउनलोड करना पसंद करते हैं।

विष्णु मंत्र का आध्यात्मिक महत्व

भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप भक्ति, मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक शांति का प्रतीक माना जाता है।

Frequently Asked Questions (FAQ)

1. विष्णु मंत्र क्या है?

विष्णु मंत्र भगवान विष्णु को समर्पित पवित्र मंत्र हैं।

2. सबसे प्रसिद्ध विष्णु मंत्र कौन सा है?

“ॐ नमो नारायणाय” और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” सबसे लोकप्रिय विष्णु मंत्र हैं।

3. विष्णु मंत्र जाप के क्या लाभ हैं?

भक्तों के अनुसार मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।

4. क्या विष्णु मंत्र रोज जप सकते हैं?

हाँ, श्रद्धा से प्रतिदिन विष्णु मंत्रों का जाप किया जा सकता है।

5. विष्णु मंत्र कब जपना चाहिए?

सुबह, गुरुवार और एकादशी के दिन जाप करना शुभ माना जाता है।

6. क्या महिलाएँ विष्णु मंत्र जप सकती हैं?

हाँ, महिलाएँ और पुरुष दोनों विष्णु मंत्र जप सकते हैं।

7. Vishnu Mantra PDF कहाँ मिलेगी?

धार्मिक वेबसाइटों पर PDF उपलब्ध होती है।

8. क्या विष्णु मंत्र मानसिक शांति देता है?

भक्तों के अनुसार नियमित जाप मानसिक शांति प्रदान करता है।

9. क्या विद्यार्थी विष्णु मंत्र जप सकते हैं?

हाँ, कई विद्यार्थी एकाग्रता और सकारात्मकता के लिए मंत्र जाप करते हैं।

10. विष्णु मंत्र जपने में कितना समय लगता है?

यह मंत्र और जाप संख्या पर निर्भर करता है। सामान्यतः 5 से 20 मिनट का समय लगता है।

11. क्या एकादशी पर विष्णु मंत्र जपना शुभ है?

हाँ, एकादशी भगवान विष्णु की पूजा के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।

12. क्या विष्णु मंत्र आध्यात्मिक उन्नति में मदद करता है?

हिंदू मान्यताओं के अनुसार मंत्र जाप आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

विष्णु मंत्र Hindi PDF डाउनलोड

निचे दिए लिंक पर क्लिक कर विष्णु मंत्र हिंदी PDF डाउनलोड करे




Vishnu Mantra in English

Vishnu Mantra in English Lyrics

Shaanta-Aakaaram Bhujaga-Shayanam Padma-Naabham Sura-Iisham|
Vishva-Aadhaaram Gagana-Sadrsham Megha-Varnna Shubha-Anggam||
Lakssmii-Kaantam Kamala-Nayanam Yogibhir-Dhyaana-Gamyam|
Vande Vissnnum Bhava-Bhaya-Haram Sarva-Loka-Eka-Naatham ||

Vishnu Mool Mantra in English Lyrics

OM Namo Narayanaya|

Om Namo Bhagavate Vasudevaya ||

Download Vishnu Mantra in English in Lyrics PDF




Vishnu Aarti

Vishnu Aarti in Hindi/Sanskrit Lyrics

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे ।

भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥

ॐ जय जगदीश हरे ।

जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का ।

स्वामी दुःख विनसे मन का ।

सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का ॥

ॐ जय जगदीश हरे ।

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी ।

स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी ।

तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी ॥

ॐ जय जगदीश हरे ।

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी ।

स्वामी तुम अन्तर्यामी ।

पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी ॥

ॐ जय जगदीश हरे ।

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता ।

स्वामी तुम पालन-कर्ता ।

मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता ॥

ॐ जय जगदीश हरे ।

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति ।

स्वामी सबके प्राणपति ।

किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति ॥

ॐ जय जगदीश हरे ।

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे ।

स्वामी तुम ठाकुर मेरे ।

अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे ॥

ॐ जय जगदीश हरे ।

विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा ।

स्वमी पाप हरो देवा ।

श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, सन्तन की सेवा ॥

ॐ जय जगदीश हरे ।

श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे ।

स्वामी जो कोई नर गावे ।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे ॥

ॐ जय जगदीश हरे ।

How to chant Vishnu Aarti

Benefits of Vishnu Aarti

Vishnu Aarti in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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