Vishnu Aarti in English

Vishnu Aarti in English Lyrics

Om Jai Jagadiish Hare
Swaami Jai Jagadiish Hare |
Bhakta Jano Ke Sankatt,
Daas Janon Ke Sankatt,
Kssann Me Duur Kare |
Om Jai Jagadiish Hare ||

Jo Dhyaave Phal Paave,

Duhkh-Bin Se Man Kaa,
Swaami Duhkh-Bin Se Man Kaa |
Sukh Sampati Ghar Aave,
Sukh Sampati Ghara Aave,
Kasstta Mitte Tan Kaa |
Om Jai Jagadiisha Hare ||

 Maat Pitaa Tum Mere,
Sharann Gahuu Kiskii,
Swaami Sharann Gahuu Maim Kiskii |
Tum Bin Aur Na Duujaa,
Tum Bin Aur Na Duujaa,
Aas Karuu Mai Jiskii |
Om Jai Jagadiish Hare ||

 Tum Puurann Paramaatmaa,
Tum Antarayaamii,
Swaami Tum Antarayaamii |
Paarabrahma Parameshwar,
Paarabrahma Parameshwar,
Tum Sab Ke Swaami |
Om Jai Jagadiish Hare ||

 Tum Karunnaa Ke Saagar,
Tum Paalan-Kartaa,
Swami Tum Paalan-Kartaa |
Mai Muurakh Phala-Kaamii
Mai Sevak Tum Swami,
Krpaa Karo Bhartaa |
Om Jai Jagadiish Hare ||

 Tum Ho Ek Agocar,
Sabke Praann-Pati,
Swami Sabake Praann-Pati |
Kis Vidh Miluu Dayaamay,
Kisa Vidh Miluu Dayaamay,
Tumko Mai Kumati |
Om Jai Jagadiish Hare ||

 Diina-Bandhu Dukh-Hartaa,
Thaakur Tuma Mere,
Swami Rakssak Tum Mere |
Apne Haath Utthaao,
Apne Sharann Lagaao
Dwaar Paddaa Tere |
Om Jai Jagadiish Hare ||

 Vissay-Vikaar Mittaao,
Paap Haro Devaa,
Swami Paap Haro Devaa |
Shraddhaa Bhakti Baddhaaao,
Shraddhaa Bhakti Baddhaaao,
Santan Kii Sevaa |
Om Jai Jagadiish Hare ||

Vishnu Aarti in English Lyrics PDF Download




श्री नरसिंह चालीसा | Narsingh Chalisa Lyrics in Hindi PDF

नरसिंह चालीसा की शक्ति का अनावरण: एक आध्यात्मिक यात्रा

Narsingh Chalisa is a devotional hymn dedicated to Lord Narsingh, a fierce avatar of Lord Vishnu, who symbolizes divine anger and protection. This powerful chant is part of Hindu mythology and is recited by devotees to seek blessings and protection from evil forces. In this article, we explore the significance of Narsingh Chalisa, its benefits, the rituals involved, and the deeper spiritual implications of this sacred hymn.

Narsingh Chalisa Hindi Lyrics

मास वैशाख कृतिका युत हरण मही को भार ।
शुक्ल चतुर्दशी सोम दिन लियो नरसिंह अवतार ।।
धन्य तुम्हारो सिंह तनु, धन्य तुम्हारो नाम ।
तुमरे सुमरन से प्रभु , पूरन हो सब काम ।।

नरसिंह देव में सुमरों तोहि ,
धन बल विद्या दान दे मोहि ।।1।।
जय जय नरसिंह कृपाला
करो सदा भक्तन प्रतिपाला ।।२ ।।
विष्णु के अवतार दयाला
महाकाल कालन को काला ।।३ ।।
नाम अनेक तुम्हारो बखानो
अल्प बुद्धि में ना कछु जानों ।।४।।
हिरणाकुश नृप अति अभिमानी
तेहि के भार मही अकुलानी ।।५।।
हिरणाकुश कयाधू के जाये
नाम भक्त प्रहलाद कहाये ।।६।।
भक्त बना बिष्णु को दासा
पिता कियो मारन परसाया ।।७।।
अस्त्र-शस्त्र मारे भुज दण्डा
अग्निदाह कियो प्रचंडा ।।८।।
भक्त हेतु तुम लियो अवतारा
दुष्ट-दलन हरण महिभारा ।।९।।
तुम भक्तन के भक्त तुम्हारे
प्रह्लाद के प्राण पियारे ।।१०।।
प्रगट भये फाड़कर तुम खम्भा
देख दुष्ट-दल भये अचंभा ।।११।।
खड्ग जिह्व तनु सुंदर साजा
ऊर्ध्व केश महादष्ट्र विराजा ।।12।।
तप्त स्वर्ण सम बदन तुम्हारा
को वरने तुम्हरों विस्तारा ।।13।।
रूप चतुर्भुज बदन विशाला
नख जिह्वा है अति विकराला ।।14।।
स्वर्ण मुकुट बदन अति भारी
कानन कुंडल की छवि न्यारी ।।15।।
भक्त प्रहलाद को तुमने उबारा
हिरणा कुश खल क्षण मह मारा ।।१६।।
ब्रह्मा, बिष्णु तुम्हे नित ध्यावे
इंद्र महेश सदा मन लावे ।।१७।।
वेद पुराण तुम्हरो यश गावे
शेष शारदा पारन पावे ।।१८।।
जो नर धरो तुम्हरो ध्याना
ताको होय सदा कल्याना ।।१९।।
त्राहि-त्राहि प्रभु दुःख निवारो
भव बंधन प्रभु आप ही टारो ।।२०।।
नित्य जपे जो नाम तिहारा
दुःख व्याधि हो निस्तारा ।।२१।।
संतान-हीन जो जाप कराये
मन इच्छित सो नर सुत पावे ।।२२।।
बंध्या नारी सुसंतान को पावे
नर दरिद्र धनी होई जावे ।।२३।।
जो नरसिंह का जाप करावे
ताहि विपत्ति सपनें नही आवे ।।२४।।
जो कामना करे मन माही
सब निश्चय सो सिद्ध हुई जाही ।।२५।।
जीवन मैं जो कछु संकट होई
निश्चय नरसिंह सुमरे सोई ।।२६ ।।
रोग ग्रसित जो ध्यावे कोई
ताकि काया कंचन होई ।।२७।।
डाकिनी-शाकिनी प्रेत बेताला
ग्रह-व्याधि अरु यम विकराला ।।२८।।
प्रेत पिशाच सबे भय खाए
यम के दूत निकट नहीं आवे ।।२९।।
सुमर नाम व्याधि सब भागे
रोग-शोक कबहूं नही लागे ।।३०।।
जाको नजर दोष हो भाई
सो नरसिंह चालीसा गाई ।।३१।।
हटे नजर होवे कल्याना
बचन सत्य साखी भगवाना ।।३२।।
जो नर ध्यान तुम्हारो लावे
सो नर मन वांछित फल पावे ।।३३।।
बनवाए जो मंदिर ज्ञानी
हो जावे वह नर जग मानी ।।३४।।
नित-प्रति पाठ करे इक बारा
सो नर रहे तुम्हारा प्यारा ।।३५।।
नरसिंह चालीसा जो जन गावे
दुःख दरिद्र ताके निकट न आवे ।।३६।।
चालीसा जो नर पढ़े-पढ़ावे
सो नर जग में सब कुछ पावे ।।37।।
यह श्री नरसिंह चालीसा
पढ़े रंक होवे अवनीसा ।।३८।।
जो ध्यावे सो नर सुख पावे
तोही विमुख बहु दुःख उठावे ।।३९।।
“शिव स्वरूप है शरण तुम्हारी
हरो नाथ सब विपत्ति हमारी “।।४० ।।
चारों युग गायें तेरी महिमा अपरम्पार ‍‌‍।
निज भक्तनु के प्राण हित लियो जगत अवतार ।।
नरसिंह चालीसा जो पढ़े प्रेम मगन शत बार ।
उस घर आनंद रहे वैभव बढ़े अपार ।।

।। इति श्री नरसिंह चालीसा संपूर्णम ।।

Importance and Benefits of Narsingh Chalisa

Reciting Narsingh Chalisa is believed to invoke Lord Narsingh’s protection against dangers and adversaries. It is particularly significant for those facing hardships in life and is thought to:

Provide Protection: Offer shielding from enemies and evil influences.
Instill Courage: Enhance the devotee’s bravery and resilience in the face of challenges.
Purify Karma: Aid in the purification of past karmic debts.
Narsingh Chalisa Rituals and Celebrations

The recitation of Narsingh Chalisa is often accompanied by specific rituals:

Lighting of Lamps: Devotees light oil lamps to symbolize the removal of darkness and ignorance.
Offerings: Sweets, fruits, and flowers are offered to the idol or image of Lord Narsingh.
Mantra Chanting: Alongside the Narsingh Chalisa, mantras like the Narasimha Moola Mantra are chanted to intensify the prayers.

नृसिंह जयंती

Lord Narsingh worship, Narasimha Puja rituals, Benefits of Narsingh Chalisa, Hindu devotional hymns, Prahlad and Narasimha story

Free Download Narsingh/Narsimha Chalisa in Hindi PDF

 




विष्णु गायत्री मंत्र

विष्णु गायत्री मंत्र इन हिंदी लिरिक्स

 ओम् श्रीविष्णवे च विद्मिहे वासुदेवाय धीमहि |

तन्नो: विष्णोः प्रचोदयात ||1||

 ओम् त्रैलोक्यमोहनाय विद्मिहे आत्मारामाय धीमहि |

तन्नो: विष्णुं प्रचोदयात ||2||

ओम् नारायणाय च विद्मिहे वासुदेवाय धीमहि |

तन्नो: विष्णोः प्रचोदयात ||3||

विष्णु गायत्री मंत्र का पाठ

विष्णु गायत्री मंत्र के लाभ

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Vishnu Gayatri Mantra

Vishnu Gayatri Mantra in Hindi/Sanskrit Lyrics

 ओम् श्रीविष्णवे च विद्मिहे वासुदेवाय धीमहि |

तन्नो: विष्णोः प्रचोदयात ||1||

 ओम् त्रैलोक्यमोहनाय विद्मिहे आत्मारामाय धीमहि |

तन्नो: विष्णुं प्रचोदयात ||2||

ओम् नारायणाय च विद्मिहे वासुदेवाय धीमहि |

तन्नो: विष्णोः प्रचोदयात ||3||

Vishnu Gayatri Mantra in English Lyrics

Ohm Shri Vishnave Cha Vidmahe Vasudevay Dhimahi |

Tanno: Vishno: Prachodayat ||1||

Ohm Trailokya Mohanay Vidmahe Aatmaramay Dhimahi |

Tanno: Vishnum: Prachodayat ||2||

Ohm Narayanay Cha Vidmahe Vasudevay Dhimahi |

Tanno: Vishno: Prachodayat ||3||

Benefits of Vishnu Gayatri Mantra

Vishnu Gayatri Mantra in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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Vishnu Suktam

Vishnu Suktam in Hindi/Sanskrit Lyrics

ॐ विष्णो॒र्नुकं॑ वी॒र्या॑णि॒ प्रवो॑चं॒ यः पार्थि॑वानि विम॒मे राजाग्ं॑सि॒ यो अस्क॑भाय॒दुत्त॑रग्ं स॒धस्थं॑ विचक्रमा॒णस्त्रे॒धोरु॑गा॒यो विष्णो॑र॒राट॑मसि॒ विष्णो॓ः पृ॒ष्ठम॑सि॒ विष्णोः॒ श्नप्त्रे॓स्थो॒ विष्णो॒स्स्यूर॑सि॒ विष्णो॓र्ध्रु॒वम॑सि वैष्ण॒वम॑सि॒ विष्ण॑वे त्वा ॥

तद॑स्य प्रि॒यम॒भिपाथो॑ अश्याम् । नरो यत्र॑ देव॒यवो॒ मद॑न्ति । उ॒रु॒क्र॒मस्य॒ स हि बन्धु॑रि॒त्था । विष्णो॓ प॒दे प॑र॒मे मध्व॒ उथ्सः॑ । प्रतद्विष्णु॑स्स्तवते वी॒र्या॑य । मृ॒गो न भी॒मः कु॑च॒रो गि॑रि॒ष्ठाः । यस्यो॒रुषु॑ त्रि॒षु वि॒क्रम॑णेषु । अधि॑क्ष॒यन्ति॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॓ । प॒रो मात्र॑या त॒नुवा॑ वृधान । न ते॑ महि॒त्वमन्व॑श्नुवन्ति ॥

उ॒भे ते॑ विद्मा॒ रज॑सी पृथि॒व्या विष्णो॑ देव॒त्वम् । प॒र॒मस्य॑ विथ्से । विच॑क्रमे पृथि॒वीमे॒ष ए॒ताम् । क्षेत्रा॑य॒ विष्णु॒र्मनु॑षे दश॒स्यन् । ध्रु॒वासो॑ अस्य की॒रयो॒ जना॑सः । ऊ॒रु॒क्षि॒तिग्ं सु॒जनि॑माचकार । त्रिर्दे॒वः पृ॑थि॒वीमे॒ष ए॒ताम् । विच॑क्रमे श॒तर्च॑सं महि॒त्वा । प्रविष्णु॑रस्तु त॒वस॒स्तवी॑यान् । त्वे॒षग्ग् ह्य॑स्य॒ स्थवि॑रस्य॒ नाम॑ ॥

अतो॑ दे॒वा अ॑वन्तु नो॒ यतो॒ विष्णु॑र्विचक्र॒मे । पृ॒थि॒व्याः स॒प्तधाम॑भिः । इ॒दं विष्णु॒र्विच॑क्र॒मे त्रे॒धा निद॑धे प॒दम् । समू॑ढमस्य पाग्ं सु॒रे ॥ त्रीणि॑ प॒दा विच॑क्रमे॒ विष्णु॑र्गो॒पा अदा॓भ्यः । ततो॒ धर्मा॑णि धा॒रयन्॑ । विष्णोः॒ कर्मा॑णि पश्यत॒ यतो॓ व्र॒तानि॑ पस्पृ॒शे । इन्द्र॑स्य॒ युज्यः॒ सखा॓ ॥

तद्विष्णो॓ः पर॒मं प॒दग्ं सदा॑ पश्यन्ति सू॒रयः॑ । दि॒वीव॒ चक्षु॒रात॑तम् । तद्विप्रा॑सो विप॒न्यवो॑ जागृ॒वाग्ं स॒स्समि॑न्धते । विष्णो॒र्यत्प॑र॒मं प॒दम् । पर्या॓प्त्या॒ अन॑न्तरायाय॒ सर्व॑स्तोमो‌உति रा॒त्र उ॑त्त॒म मह॑र्भवति सर्व॒स्याप्त्यै॒ सर्व॑स्य॒ जित्त्यै॒ सर्व॑मे॒व तेना॓प्नोति॒ सर्वं॑ जयति ॥

ॐ शान्तिः॒ शान्तिः॒ शान्तिः॑ ॥

How to chant Vishnu Suktam

Benefits of Vishnu Suktam

Vishnu Suktam in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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विष्णु सुक्त

विष्णु सुक्त का पाठ इन हिंदी लिरिक्स

ॐ विष्णो॒र्नुकं॑ वी॒र्या॑णि॒ प्रवो॑चं॒ यः पार्थि॑वानि विम॒मे राजाग्ं॑सि॒ यो अस्क॑भाय॒दुत्त॑रग्ं स॒धस्थं॑ विचक्रमा॒णस्त्रे॒धोरु॑गा॒यो विष्णो॑र॒राट॑मसि॒ विष्णो॓ः पृ॒ष्ठम॑सि॒ विष्णोः॒ श्नप्त्रे॓स्थो॒ विष्णो॒स्स्यूर॑सि॒ विष्णो॓र्ध्रु॒वम॑सि वैष्ण॒वम॑सि॒ विष्ण॑वे त्वा ॥

तद॑स्य प्रि॒यम॒भिपाथो॑ अश्याम् । नरो यत्र॑ देव॒यवो॒ मद॑न्ति । उ॒रु॒क्र॒मस्य॒ स हि बन्धु॑रि॒त्था । विष्णो॓ प॒दे प॑र॒मे मध्व॒ उथ्सः॑ । प्रतद्विष्णु॑स्स्तवते वी॒र्या॑य । मृ॒गो न भी॒मः कु॑च॒रो गि॑रि॒ष्ठाः । यस्यो॒रुषु॑ त्रि॒षु वि॒क्रम॑णेषु । अधि॑क्ष॒यन्ति॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॓ । प॒रो मात्र॑या त॒नुवा॑ वृधान । न ते॑ महि॒त्वमन्व॑श्नुवन्ति ॥

उ॒भे ते॑ विद्मा॒ रज॑सी पृथि॒व्या विष्णो॑ देव॒त्वम् । प॒र॒मस्य॑ विथ्से । विच॑क्रमे पृथि॒वीमे॒ष ए॒ताम् । क्षेत्रा॑य॒ विष्णु॒र्मनु॑षे दश॒स्यन् । ध्रु॒वासो॑ अस्य की॒रयो॒ जना॑सः । ऊ॒रु॒क्षि॒तिग्ं सु॒जनि॑माचकार । त्रिर्दे॒वः पृ॑थि॒वीमे॒ष ए॒ताम् । विच॑क्रमे श॒तर्च॑सं महि॒त्वा । प्रविष्णु॑रस्तु त॒वस॒स्तवी॑यान् । त्वे॒षग्ग् ह्य॑स्य॒ स्थवि॑रस्य॒ नाम॑ ॥

अतो॑ दे॒वा अ॑वन्तु नो॒ यतो॒ विष्णु॑र्विचक्र॒मे । पृ॒थि॒व्याः स॒प्तधाम॑भिः । इ॒दं विष्णु॒र्विच॑क्र॒मे त्रे॒धा निद॑धे प॒दम् । समू॑ढमस्य पाग्ं सु॒रे ॥ त्रीणि॑ प॒दा विच॑क्रमे॒ विष्णु॑र्गो॒पा अदा॓भ्यः । ततो॒ धर्मा॑णि धा॒रयन्॑ । विष्णोः॒ कर्मा॑णि पश्यत॒ यतो॓ व्र॒तानि॑ पस्पृ॒शे । इन्द्र॑स्य॒ युज्यः॒ सखा॓ ॥

तद्विष्णो॓ः पर॒मं प॒दग्ं सदा॑ पश्यन्ति सू॒रयः॑ । दि॒वीव॒ चक्षु॒रात॑तम् । तद्विप्रा॑सो विप॒न्यवो॑ जागृ॒वाग्ं स॒स्समि॑न्धते । विष्णो॒र्यत्प॑र॒मं प॒दम् । पर्या॓प्त्या॒ अन॑न्तरायाय॒ सर्व॑स्तोमो‌உति रा॒त्र उ॑त्त॒म मह॑र्भवति सर्व॒स्याप्त्यै॒ सर्व॑स्य॒ जित्त्यै॒ सर्व॑मे॒व तेना॓प्नोति॒ सर्वं॑ जयति ॥

ॐ शान्तिः॒ शान्तिः॒ शान्तिः॑ ॥

विष्णु सुक्त का पाठ

विष्णु सुक्त पाठ के लाभ

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विष्णु षट्पदी

विष्णु षट्पदी का पाठ इन हिंदी लिरिक्स

अविनयमपनय विष्णो दमय मनः शमय विषयमृगतृष्णाम् ।
भूतदयां विस्तारय तारय संसारसागरतः ॥ 1 ॥

दिव्यधुनीमकरन्दे परिमलपरिभोगसच्चिदानन्दे ।
श्रीपतिपदारविन्दे भवभयखेदच्छिदे वन्दे ॥ 2 ॥

सत्यपि भेदापगमे नाथ तवा‌உहं न मामकीनस्त्वम् ।
सामुद्रो हि तरङ्गः क्वचन समुद्रो न तारङ्गः ॥ 3 ॥

उद्धृतनग नगभिदनुज दनुजकुलामित्र मित्रशशिदृष्टे ।
दृष्टे भवति प्रभवति न भवति किं भवतिरस्कारः ॥ 4 ॥

मत्स्यादिभिरवतारैरवतारवता‌உवता सदा वसुधाम् ।
परमेश्वर परिपाल्यो भवता भवतापभीतो‌உहम् ॥ 5 ॥

दामोदर गुणमन्दिर सुन्दरवदनारविन्द गोविन्द ।
भवजलधिमथनमन्दर परमं दरमपनय त्वं मे ॥ 6 ॥

नारायण करुणामय शरणं करवाणि तावकौ चरणौ ।
इति षट्पदी मदीये वदनसरोजे सदा वसतु ॥

विष्णु षट्पदी का पाठ

विष्णु षट्पदी के लाभ

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नृसिंह जयंती 2027 – दैवीय सुरक्षा और शक्ति को अपनाएं

नृसिंह जयंती भगवान नृसिंह के दिव्य स्वरूप का प्रतीक है, जो भगवान विष्णु के चौथे अवतार हैं, जो आधे-सिंह, आधे-पुरुष के रूप में हैं। यह दिन भगवान नरसिम्हा द्वारा प्रतिकूलताओं और बुराई के खिलाफ प्रदान की जाने वाली दिव्य सुरक्षा के लिए हिंदू समुदाय में बहुत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यहां, हम नृसिंह जयंती से जुड़ी समृद्ध पौराणिक कथाओं, 2027 की तारीख, समारोह और अनुष्ठानों और इस पवित्र दिन को मनाने के कई गुना लाभों के बारे मै बता रहे हैं।

भगवान नृसिंह की हिंदू पौराणिक कथा

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान नृसिंह अपने भक्त अनुयायी प्रह्लाद को उसके राक्षस पिता हिरण्यकशिपु से बचाने के लिए नृसिंह जयंती पर गोधूलि (संध्या) के दौरान प्रकट हुए थे। हिरण्यकश्यप को वरदान था कि उसे दिन या रात के दौरान, घर के अंदर या बाहर, किसी आदमी या जानवर द्वारा नहीं मारा जा सकता था, लेकिन भगवान नृसिंह ने अपने अद्वितीय रूप में, इन बाधाओं पर काबू पा लिया। भगवान नृसिंह को अन्याय के खिलाफ दैवीय क्रोध के प्रतीक और संकट में भक्तों के रक्षक के रूप में पूजा जाता है।

नृसिंह जयंती 2027 तारीख और समारोह

2027 में नरसिम्हा जयंती 18 मई, मंगलवार को को मनाई जाएगी । भक्त व्रत रखकर, पूजा करके और भगवान नरसिम्हा को समर्पित मंत्रों का जाप करके मनाते हैं। मंदिरों में भगवान के प्रकट होने के जीवंत अभिनय होते हैं, और भक्त उनके प्रकट होने के क्षण को मनाने के लिए शाम की प्रार्थना के लिए इकट्ठा होते हैं।

पूजा का शुभ मुहूर्त:चतुर्दशी तिथि 18 मई 2027 को शाम 04:03 बजे से शुरू होगी। नरसिंह भगवान का प्राकट्य सूर्यास्त के समय माना जाता है, इसलिए सायाह्न (शाम) काल पूजा का समय सबसे उत्तम माना गया है:सायाह्न काल पूजा का समय: शाम 04:23 से शाम 07:06 तक
पूजा की कुल अवधि: 2 घंटे 44 मिनट
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 19 मई 2027 को दोपहर 04:02 बजे

नृसिंह जयंती: महत्व एवं लाभ

ऐसा माना जाता है कि नरसिम्हा जयंती मनाने से बाधाएं दूर होती हैं और अशुभ प्रभावों से रक्षा होती है। भक्त स्वास्थ्य, समृद्धि और अपने आसपास की बुरी शक्तियों के विनाश के लिए भगवान नरसिम्हा का आशीर्वाद मांगते हैं। यह आध्यात्मिक कायाकल्प और ईश्वरीय न्याय में विश्वास की पुनः पुष्टि का दिन है।

नृसिंह जयंती: अनुष्ठान और मंत्र

उपवास (व्रत): भक्त नरसिम्हा जयंती के दिन सूर्योदय से लेकर अगली सुबह तक उपवास करते हैं, सूर्योदय के बाद उपवास तोड़ते हैं।
पूजा और आरती: घर और मंदिरों में विशेष पूजा की जाती है। अनुष्ठान में भगवान नरसिम्हा की मूर्ति पर फूल, मिठाइयाँ और अभिषेकम (पवित्र स्नान) चढ़ाना शामिल है।
मंत्रों का जाप: शाम के समय ‘नरसिम्हा मूल मंत्र‘ और ‘नरसिम्हा गायत्री मंत्र‘ का जाप विशेष रूप से शक्तिशाली माना जाता है।

नृसिंह जयंती व्रत कथा

इस दिन सुनाई जाने वाली व्रत कथा में प्रह्लाद को बचाने के लिए भगवान नरसिम्हा के प्रकट होने की कहानी शामिल है, जिसमें प्रतिकूल परिस्थितियों पर विजय पाने वाली भक्ति और अन्याय के सामने दैवीय हस्तक्षेप के विषयों पर जोर दिया गया है।

श्री नरसिंह चालीसा
Narsingh Chalisa
Narasimha Mantra
नृसिंह मंत्र




Pitar Chalisa in Marathi PDF

पितृ चालिसाचे आध्यात्मिक महत्त्व: पूर्वजांचे आशीर्वाद

पित्र चालिसा हा हिंदू धर्मातील पूर्वजांना (पित्रांना) समर्पित केलेला भक्ती ग्रंथ आहे. हे एखाद्याच्या पूर्वजांच्या आत्म्याचा सन्मान करण्यासाठी आणि आशीर्वाद मिळविण्यासाठी वाचले जाते, ज्यांना कुटुंबाच्या आध्यात्मिक आणि भौतिक कल्याणात महत्त्वाची भूमिका बजावली जाते असे मानले जाते. हे पोस्ट पितृ चालिसाचे महत्त्व, त्याचे फायदे, त्याच्याशी संबंधित विधी आणि त्याच्या पालनासाठी शुभ तारखा आणि मुहूर्तांसह विशिष्ट तपशील स्पष्ट करते.

पितर चालीसा मराठीत

।। दोहा ।।

हे पितरेश्वर आपको दे दियो आशीर्वाद
चरणाशीश नवा दियो रखदो सिर पर हाथ
सबसे पहले गणपत पाछे घर का देव मनावा जी
हे पितरेश्वर दया राखियो, करियो मन की चाया जी ।।

।। चौपाई ।।

पितरेश्वर करो मार्ग उजागर
चरण रज की मुक्ति सागर

परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा
मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा

मातृ-पितृ देव मन जो भावे
सोई अमित जीवन फल पावे

जै-जै-जै पित्तर जी साईं
पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं

चारों ओर प्रताप तुम्हारा
संकट में तेरा ही सहारा

नारायण आधार सृष्टि का
पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का

प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते
भाग्य द्वार आप ही खुलवाते

झुंझनू में दरबार है साजे
सब देवों संग आप विराजे

प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा
कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा

पित्तर महिमा सबसे न्यारी
जिसका गुणगावे नर नारी

तीन मण्ड में आप बिराजे
बसु रुद्र आदित्य में साजे

नाथ सकल संपदा तुम्हारी
मैं सेवक समेत सुत नारी

छप्पन भोग नहीं हैं भाते
शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते

तुम्हारे भजन परम हितकारी
छोटे बड़े सभी अधिकारी

भानु उदय संग आप पुजावै
पांच अँजुलि जल रिझावे

ध्वज पताका मण्ड पे है साजे
अखण्ड ज्योति में आप विराजे

सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी
धन्य हुई जन्म भूमि हमारी

शहीद हमारे यहाँ पुजाते
मातृ भक्ति संदेश सुनाते

जगत पित्तरो सिद्धान्त हमारा
धर्म जाति का नहीं है नारा

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
सब पूजे पित्तर भाई

हिन्दू वंश वृक्ष है हमारा
जान से ज्यादा हमको प्यारा

गंगा ये मरुप्रदेश की
पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की

बन्धु छोड़ ना इनके चरणाँ
इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा

चौदस को जागरण करवाते
अमावस को हम धोक लगाते

जात जडूला सभी मनाते
नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते

धन्य जन्म भूमि का वो फूल है
जिसे पितृ मण्डल की मिली धूल है

श्री पित्तर जी भक्त हितकारी
सुन लीजे प्रभु अरज हमारी

निशिदिन ध्यान धरे जो कोई
ता सम भक्त और नहीं कोई

तुम अनाथ के नाथ सहाई
दीनन के हो तुम सदा सहाई

चारिक वेद प्रभु के साखी
तुम भक्तन की लज्जा राखी

नाम तुम्हारो लेत जो कोई
ता सम धन्य और नहीं कोई

जो तुम्हारे नित पाँव पलोटत
नवों सिद्धि चरणा में लोटत

सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी
जो तुम पे जावे बलिहारी

जो तुम्हारे चरणा चित्त लावे
ताकी मुक्ति अवसी हो जावे

सत्य भजन तुम्हारो जो गावे
सो निश्चय चारों फल पावे

तुमहिं देव कुलदेव हमारे
तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे

सत्य आस मन में जो होई
मनवांछित फल पावें सोई

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई
शेष सहस्र मुख सके न गाई

मैं अतिदीन मलीन दुखारी
करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी

अब पित्तर जी दया दीन पर कीजै
अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै

।। दोहा ।।

पित्तरों को स्थान दो, तीरथ और स्वयं ग्राम
श्रद्धा सुमन चढ़ें वहां, पूरण हो सब काम

झुंझनू धाम विराजे हैं, पित्तर हमारे महान
दर्शन से जीवन सफल हो, पूजे सकल जहान

जीवन सफल जो चाहिए, चले झुंझनू धाम
पित्तर चरण की धूल ले, हो जीवन सफल महान

/ इति पितृ चालिसा संपते/

पितृ चालीसाचे महत्त्व

हिंदू श्रद्धेनुसार, पूर्वजांना आदराचे स्थान आहे आणि त्यांचे आशीर्वाद समृद्ध आणि अडथळामुक्त जीवनासाठी आवश्यक मानले जातात. पितृ चालिसा हे वडिलोपार्जित क्षेत्राशी जोडण्यासाठी, सुसंवादी कौटुंबिक जीवन आणि आध्यात्मिक वाढीस प्रोत्साहन देण्यासाठी एक शक्तिशाली आध्यात्मिक साधन आहे. हा कृतज्ञता व्यक्त करण्याचा आणि पूर्वजांकडून मार्गदर्शन मिळविण्याचा एक प्रकार आहे, ज्यामुळे घरावर त्यांचे निरंतर आशीर्वाद सुनिश्चित होतात.

पितृ चालिसा पठणाचे फायदे

अध्यात्मिक कनेक्शन: जिवंत कुटुंबातील सदस्य आणि त्यांचे पूर्वज यांच्यातील बंध मजबूत करते, सकारात्मक उर्जेचा स्थिर प्रवाह सुनिश्चित करते.
पूर्वजांच्या कर्मापासून संरक्षण: सध्याच्या कुटुंबातील सदस्यांवर पूर्वजांच्या भूतकाळातील कर्माचा प्रभाव कमी करण्यास मदत होते.
सुसंवाद आणि समृद्धी : नियमित पठण केल्याने पितरांना प्रसन्न करून कुटुंबात सुसंवाद, सुख आणि समृद्धी येऊ शकते.

पूर्वजांसाठी विधी

पितृ चालीसा सामान्यतः पितृ पक्षादरम्यान पाठ केला जातो, ज्या काळात हिंदू त्यांच्या पूर्वजांना श्रद्धांजली अर्पण करतात. विधींमध्ये हे समाविष्ट आहे:
तर्पण : पितरांच्या आत्म्याला तृप्त करण्यासाठी पाण्यात काळे तीळ मिसळून तर्पण अर्पण करावे.
श्राद्ध: पिंड दान (तांदळाचे गोळे अर्पण) आणि ब्राह्मणांना भोजन यांचा समावेश असलेले विधी करणे.
पित्र चालिसाचे पठण: मृत पूर्वजांच्या छायाचित्रे किंवा प्रतिकात्मक प्रतिनिधित्वासह केले जाते.
पितृ स्तोत्राचे पठण: 

पितृ पक्ष 2026 तारीख आणि वेळ

पूर्वजांचा आशीर्वाद. वडिलोपार्जित कृत्ये

पितृ स्तोत्र

पितृ आरती

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पितर चालीसा का आध्यात्मिक महत्व: पितरों का अनुष्ठान और आशीर्वाद

पितर चालीसा | Meaning, Benefits & Spiritual Importance

पितर चालीसा क्या है?

पितर चालीसा हिंदू धर्म में पितृ देवताओं और पूर्वजों को समर्पित एक पवित्र भक्ति पाठ है। यह चालीसा विशेष रूप से पितृ पक्ष, श्राद्ध, तर्पण और पिंड दान जैसे धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान पढ़ी जाती है।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार पूर्वजों का सम्मान और स्मरण करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। भक्त पितर चालीसा का पाठ पूर्वजों की कृपा, पारिवारिक सुख-शांति और आध्यात्मिक संतुलन के लिए करते हैं।

पितर चालीसा हिंदी मे

।। दोहा ।।

हे पितरेश्वर आपको दे दियो आशीर्वाद
चरणाशीश नवा दियो रखदो सिर पर हाथ
सबसे पहले गणपत पाछे घर का देव मनावा जी
हे पितरेश्वर दया राखियो, करियो मन की चाया जी ।।

।। चौपाई ।।

पितरेश्वर करो मार्ग उजागर
चरण रज की मुक्ति सागर

परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा
मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा

मातृ-पितृ देव मन जो भावे
सोई अमित जीवन फल पावे

जै-जै-जै पित्तर जी साईं
पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं

चारों ओर प्रताप तुम्हारा
संकट में तेरा ही सहारा

नारायण आधार सृष्टि का
पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का

प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते
भाग्य द्वार आप ही खुलवाते

झुंझनू में दरबार है साजे
सब देवों संग आप विराजे

प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा
कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा

पित्तर महिमा सबसे न्यारी
जिसका गुणगावे नर नारी

तीन मण्ड में आप बिराजे
बसु रुद्र आदित्य में साजे

नाथ सकल संपदा तुम्हारी
मैं सेवक समेत सुत नारी

छप्पन भोग नहीं हैं भाते
शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते

तुम्हारे भजन परम हितकारी
छोटे बड़े सभी अधिकारी

भानु उदय संग आप पुजावै
पांच अँजुलि जल रिझावे

ध्वज पताका मण्ड पे है साजे
अखण्ड ज्योति में आप विराजे

सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी
धन्य हुई जन्म भूमि हमारी

शहीद हमारे यहाँ पुजाते
मातृ भक्ति संदेश सुनाते

जगत पित्तरो सिद्धान्त हमारा
धर्म जाति का नहीं है नारा

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
सब पूजे पित्तर भाई

हिन्दू वंश वृक्ष है हमारा
जान से ज्यादा हमको प्यारा

गंगा ये मरुप्रदेश की
पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की

बन्धु छोड़ ना इनके चरणाँ
इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा

चौदस को जागरण करवाते
अमावस को हम धोक लगाते

जात जडूला सभी मनाते
नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते

धन्य जन्म भूमि का वो फूल है
जिसे पितृ मण्डल की मिली धूल है

श्री पित्तर जी भक्त हितकारी
सुन लीजे प्रभु अरज हमारी

निशिदिन ध्यान धरे जो कोई
ता सम भक्त और नहीं कोई

तुम अनाथ के नाथ सहाई
दीनन के हो तुम सदा सहाई

चारिक वेद प्रभु के साखी
तुम भक्तन की लज्जा राखी

नाम तुम्हारो लेत जो कोई
ता सम धन्य और नहीं कोई

जो तुम्हारे नित पाँव पलोटत
नवों सिद्धि चरणा में लोटत

सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी
जो तुम पे जावे बलिहारी

जो तुम्हारे चरणा चित्त लावे
ताकी मुक्ति अवसी हो जावे

सत्य भजन तुम्हारो जो गावे
सो निश्चय चारों फल पावे

तुमहिं देव कुलदेव हमारे
तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे

सत्य आस मन में जो होई
मनवांछित फल पावें सोई

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई
शेष सहस्र मुख सके न गाई

मैं अतिदीन मलीन दुखारी
करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी

अब पित्तर जी दया दीन पर कीजै
अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै

।। दोहा ।।

पित्तरों को स्थान दो, तीरथ और स्वयं ग्राम
श्रद्धा सुमन चढ़ें वहां, पूरण हो सब काम

झुंझनू धाम विराजे हैं, पित्तर हमारे महान
दर्शन से जीवन सफल हो, पूजे सकल जहान

जीवन सफल जो चाहिए, चले झुंझनू धाम
पित्तर चरण की धूल ले, हो जीवन सफल महान

/ इति पितर चालीसा समाप्त /

पितर चालीसा का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में पितरों को परिवार का अदृश्य रक्षक माना जाता है।

पितर चालीसा का महत्व इसलिए माना जाता है क्योंकि भक्तों के अनुसार यह:

  • पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करती है
  • पितृ दोष से जुड़ी समस्याओं को कम करने में सहायक मानी जाती है
  • परिवार में सुख-शांति और सकारात्मकता लाती है
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करती है
  • आध्यात्मिक वातावरण बनाती है

पितर चालीसा पढ़ने के लाभ

1. पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है

भक्त मानते हैं कि पितर चालीसा से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार पर कृपा बनाए रखते हैं।

2. पितृ दोष शांति में सहायक

कई लोग पितृ दोष से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका पाठ करते हैं।

3. पारिवारिक शांति बढ़ती है

नियमित पाठ घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति लाने में सहायक माना जाता है।

4. आध्यात्मिक संतुलन मिलता है

चालीसा का पाठ मन को शांत और श्रद्धा से भर देता है।

5. पितृ पक्ष में विशेष महत्व

पितृ पक्ष और अमावस्या के दौरान इसका पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।

पितर चालीसा कब पढ़नी चाहिए?

सबसे शुभ समय:

  • पितृ पक्ष
  • अमावस्या
  • श्राद्ध कर्म के समय
  • सुबह स्नान के बाद
  • तर्पण और पिंड दान के दौरान

पितर चालीसा PDF Download

कई भक्त पितर चालीसा PDF डाउनलोड करना पसंद करते हैं ताकि:

दैनिक पाठ कर सकें
श्राद्ध में उपयोग कर सकें
ऑफलाइन पढ़ सकें
परिवार के साथ पूजा कर सकें
धार्मिक अध्ययन कर सकें

Frequently Asked Questions (FAQ)

1. पितर चालीसा क्या है?

पितर चालीसा पितृ देवताओं और पूर्वजों को समर्पित भक्ति पाठ है।

2. पितर चालीसा पढ़ने के क्या लाभ हैं?

भक्तों के अनुसार यह पितरों की कृपा, पारिवारिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।

3. पितर चालीसा कब पढ़नी चाहिए?

पितृ पक्ष, अमावस्या और श्राद्ध कर्म के समय इसका पाठ शुभ माना जाता है।

4. क्या पितर चालीसा पितृ दोष शांति में सहायक है?

कई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका पाठ पितृ दोष से जुड़े उपायों में किया जाता है।

5. पितृ पक्ष क्या होता है?

पितृ पक्ष हिंदू धर्म में पूर्वजों को समर्पित एक विशेष अवधि होती है।

6. क्या महिलाएँ पितर चालीसा पढ़ सकती हैं?

हाँ, महिलाएँ और पुरुष दोनों श्रद्धा से इसका पाठ कर सकते हैं।

7. Pitra Chalisa PDF कहाँ मिलेगी?

धार्मिक वेबसाइटों पर PDF उपलब्ध होती है।

8. क्या पितर चालीसा श्राद्ध में पढ़ी जाती है?

हाँ, इसे श्राद्ध और तर्पण के समय पढ़ा जाता है।

9. पितर चालीसा पढ़ने में कितना समय लगता है?

सामान्यतः 5 से 15 मिनट का समय लगता है।

10. क्या परिवार के साथ पितर चालीसा पढ़ सकते हैं?

हाँ, कई परिवार सामूहिक रूप से इसका पाठ करते हैं।

11. क्या पितर चालीसा सकारात्मक ऊर्जा लाती है?

भक्तों के अनुसार इसका पाठ घर में शांति और सकारात्मकता बढ़ाता है।

12. क्या अमावस्या पर पितर चालीसा पढ़ना शुभ है?

हाँ, अमावस्या पितरों की पूजा और स्मरण के लिए शुभ मानी जाती है।
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