खाटू श्याम चालीसा | Khatu Shyam Chalisa in Hindi Lyrics PDF

खाटू श्याम चालीसा | महत्व, पूजा विधि और आध्यात्मिक लाभ

खाटू श्याम जी कौन हैं?

खाटू श्याम जी को महाभारत के महान योद्धा बर्बरीक के रूप में पूजा जाता है। बर्बरीक भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, महाभारत युद्ध से पूर्व भगवान Lord Krishna ने बर्बरीक से दान स्वरूप उनका शीश माँगा। बर्बरीक ने प्रसन्नतापूर्वक अपना शीश दान कर दिया। उनकी अद्वितीय भक्ति और त्याग से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे “श्याम” नाम से पूजे जाएंगे।

आज खाटू श्याम जी को “हारे का सहारा” और “लखदातार” के नाम से भी जाना जाता है।

खाटू श्याम चालीसा क्या है?

खाटू श्याम चालीसा एक भक्तिपूर्ण स्तुति है जिसमें श्याम बाबा की महिमा, कृपा, चमत्कार, त्याग और भक्तवत्सल स्वरूप का वर्णन किया गया है।

इसका नियमित पाठ श्रद्धालुओं को भक्ति, मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल प्रदान करने वाला माना जाता है।

Khatu Shyam Chalisa in Hindi Lyrics
खाटू श्याम चालीसा

दोहा

श्री गुरु चरण ध्यान धर, सुमिरि सच्चिदानन्द।

श्याम चालीसा भजत हूँ, रच चैपाई छन्द।।

चौपाई

श्याम श्याम भजि बारम्बारा,सहज ही हो भवसागर पारा।

इन सम देव न दूजा कोई, दीन दयालु न दाता होई।

भीमसुपुत्र अहिलवती जाया, कहीं भीम का पौत्र कहाया।

यह सब कथा सही कल्पान्तर, तनिक न मानों इनमें अन्तर।

बर्बरीक विष्णु अवतारा, भक्तन हेतु मनुज तनु धारा।

वसुदेव देवकी प्यारे, यशुमति मैया नन्द दुलारे।

मधुसूदन गोपाल मुरारी, बृजकिशोर गोवर्धन धारी।

सियाराम श्री हरि गोविन्दा, दीनपाल श्री बाल मुकुन्दा।

 दामोदर रणछोड़ बिहारी, नाथ द्वारिकाधीश खरारी।

नरहरि रूप प्रहलद प्यारा, खम्भ फारि हिरनाकुश मारा।

 राधा वल्लभ रुक्मिणी कंता, गोपी बल्लभ कंस हनंता।

मनमोहन चितचोर कहाये, माखन चोरि चोरि कर खाये।

मुरलीधर यदुपति घनश्याम, कृष्ण पतितपावन अभिराम।

 मायापति लक्ष्मीपति ईसा, पुरुषोत्तम केशव जगदीशा।

विश्वपति त्रिभुवन उजियारा, दीनबन्धु भक्तन रखवारा।

प्रभु का भेद कोई न पाया, शेष महेश थके मुनियारा।

 नारद शारद ऋषि योगिन्दर, श्याम श्याम सब रटत निरन्तर।

कवि कोविद करि सके न गिनन्ता, नाम अपार अथाह अनन्ता।

हर सृष्टि हर युग में भाई, ले अवतार भक्त सुखदाई।

 हृदय माँहि करि देखु विचारा, श्याम भजे तो हो निस्तारा।

कीर पड़ावत गणिका तारी, भीलनी की भक्ति बलिहारी।

सती अहिल्या गौतम नारी, भई श्राप वश शिला दुखारी।

श्याम चरण रच नित लाई, पहुँची पतिलोक में जाई।

अजामिल अरु सदन कसाई, नाम प्रताप परम गति पाई।

जाके श्याम नाम अधारा, सुख लहहि दुख दूर हो सारा।

श्याम सुलोचन है अति सुन्दर, मोर मुकुट सिर तन पीताम्बर।

गल वैजयन्तिमाल सुहाई, छवि अनूप भक्तन मन भाई।

श्याम श्याम सुमिरहुं दिनराती, शाम दुपहरि अरु परभाती।

श्याम सारथी सिके रथ के, रोड़े दूर होय उस पथ के।

श्याम भक्त न कहीं पर हारा, भीर परि तब श्याम पुकारा।

रसना श्याम नाम पी ले, जी ले श्याम नाम के हाले।

संसारी सुख भोग मिलेगा, अन्त श्याम सुख योग मिलेगा।

श्याम प्रभु हैं तन के काले, मन के गोरे भोले भाले।

श्याम संत भक्तन हितकारी, रोग दोष अघ नाशै भारी।

प्रेम सहित जे नाम पुकारा, भक्त लगत श्याम को प्यारा।

खाटू में है मथुरा वासी, पार ब्रह्म पूरण अविनासी।

सुधा तान भरि मुरली बजाई, चहुं दिशि नाना जहाँ सुनि पाई।

वृद्ध बाल जेते नारी नर, मुग्ध भये सुनि वंशी के स्वर।

दौड़ दौड़ पहुँचे सब जाई, खाटू में जहाँ श्याम कन्हाई।

 जिसने श्याम स्वरूप निहारा, भव भय से पाया छुटकारा।

दोहा श्याम सलोने साँवरे, बर्बरीक तनु धार। इच्छा पूर्ण भक्त की, करो न लाओ बार।।

श्री विष्णु चालीसा
श्री कृष्ण चालीसा
श्री नरसिंह चालीसा
पितर चालीसा
પિતર ચાલીસા
खाटू श्याम चालीसा

खाटू श्याम चालीसा का धार्मिक महत्व

खाटू श्याम चालीसा का पाठ:

श्याम बाबा की कृपा प्राप्त करने हेतु किया जाता है।
भक्ति और श्रद्धा को मजबूत बनाता है।
सकारात्मक सोच विकसित करने में सहायक माना जाता है।
जीवन की कठिन परिस्थितियों में विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
भगवान के प्रति समर्पण की भावना को बढ़ाता है।

खाटू श्याम चालीसा पाठ के लाभ

1. मन को शांति प्रदान करता है
नियमित पाठ मानसिक तनाव को कम करने और मन को स्थिर रखने में सहायक माना जाता है।

2. श्रद्धा और विश्वास बढ़ाता है
श्याम बाबा के प्रति भक्ति और समर्पण की भावना मजबूत होती है।

3. सकारात्मक ऊर्जा का संचार
भक्ति भाव से किया गया पाठ घर और मन में सकारात्मक वातावरण बनाता है।

4. आध्यात्मिक उन्नति
यह व्यक्ति को धर्म और भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

5. कठिन समय में मानसिक बल
श्याम बाबा को संकटमोचक और भक्तों का सहारा माना जाता है।

खाटू श्याम जी की पारंपरिक पूजा विधि

खाटू श्याम मंदिर और श्याम भक्तों में प्रचलित पूजा विधि के अनुसार:

आवश्यक सामग्री
घी का दीपक
धूप
फूल
चंदन
रोली
अक्षत
तुलसी (स्थानीय परंपरा अनुसार)
माखन-मिश्री
पेड़ा या बूंदी का प्रसाद
स्वच्छ जल

खाटू श्याम पूजा की विधि

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • श्याम बाबा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
  • दीपक और धूप जलाएं।
  • चंदन, रोली और फूल अर्पित करें।
  • “ॐ श्री श्याम देवाय नमः” मंत्र का जप करें।
  • खाटू श्याम चालीसा का पाठ करें।
  • श्याम बाबा की आरती करें।
  • प्रसाद अर्पित कर परिवार में वितरित करें।
  • अंत में अपनी प्रार्थना और मनोकामना निवेदन करें।

खाटू श्याम मंदिर का महत्व

Khatu Shyam Temple राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में स्थित है।

मंदिर की प्रमुख विशेषताएँ:

  • श्याम बाबा का पवित्र शीश विग्रह
  • श्याम कुंड
  • फाल्गुन मेला
  • निशान यात्रा
  • एकादशी विशेष दर्शन
  • लाखों श्रद्धालुओं की वार्षिक यात्रा
  • खाटू धाम भारत के सबसे लोकप्रिय धार्मिक तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है।

खाटू श्याम चालीसा कब पढ़नी चाहिए?

विशेष रूप से:

एकादशी
गुरुवार
रविवार
फाल्गुन मास
खाटू धाम यात्रा से पहले
श्याम बाबा जन्मोत्सव

हालांकि, श्रद्धा के साथ किसी भी दिन इसका पाठ किया जा सकता है।

खाटू श्याम चालीसा और श्याम भक्ति

भक्त सामान्यतः खाटू श्याम चालीसा के साथ:

श्याम आरती
श्याम बाबा भजन
श्याम मंत्र
कृष्ण चालीसा
विष्णु सहस्रनाम
हरिनाम संकीर्तन

का भी पाठ करते हैं।

Frequently Asked Questions (FAQ)

1. खाटू श्याम जी कौन हैं?
खाटू श्याम जी महाभारत के वीर बर्बरीक का पूजनीय स्वरूप माने जाते हैं।

2. खाटू श्याम चालीसा क्या है?
यह श्याम बाबा की महिमा का वर्णन करने वाली चालीस चौपाइयों की भक्तिपूर्ण रचना है।

3. खाटू श्याम चालीसा पढ़ने के क्या लाभ हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह श्रद्धा, मानसिक शांति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है।

4. खाटू श्याम चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
एकादशी, गुरुवार, रविवार और फाल्गुन मास में इसका पाठ विशेष शुभ माना जाता है।

5. क्या खाटू श्याम चालीसा रोज पढ़ सकते हैं?
हाँ, इसे प्रतिदिन श्रद्धा और भक्ति के साथ पढ़ा जा सकता है।

6. खाटू श्याम मंदिर कहाँ स्थित है?
खाटू श्याम मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में स्थित है।

7. खाटू श्याम जी को हारे का सहारा क्यों कहा जाता है?
भक्तों का विश्वास है कि श्याम बाबा कठिन समय में अपने भक्तों की सहायता करते हैं, इसलिए उन्हें हारे का सहारा कहा जाता है।

8. खाटू श्याम पूजा में कौन सा प्रसाद चढ़ाया जाता है?
पेड़ा, बूंदी, माखन-मिश्री और अन्य मिठाइयाँ सामान्यतः अर्पित की जाती हैं।

9. क्या महिलाएँ खाटू श्याम चालीसा पढ़ सकती हैं?
हाँ, महिलाएँ और पुरुष दोनों इसका पाठ कर सकते हैं।

10. खाटू श्याम जी का मुख्य मंत्र क्या है?
“ॐ श्री श्याम देवाय नमः” लोकप्रिय श्याम मंत्रों में से एक है।

11. फाल्गुन मेले का क्या महत्व है?
फाल्गुन मेला खाटू श्याम जी का सबसे बड़ा वार्षिक उत्सव माना जाता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं।

12. क्या खाटू श्याम जी भगवान कृष्ण के स्वरूप हैं?
परंपरागत मान्यताओं के अनुसार खाटू श्याम जी को भगवान कृष्ण के विशेष आशीर्वाद से पूजनीय स्वरूप प्राप्त हुआ।

खाटू श्याम आरती | Khatu Shyam  Aarti in Hindi PDF

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Krishna Chalisa in Hindi Lyrics PDF | श्री कृष्ण चालीसा

Krishna Chalisa | Meaning, Benefits and Spiritual Significance

What is Krishna Chalisa?

Krishna Chalisa is a sacred devotional hymn dedicated to Lord Krishna, one of the most beloved manifestations of Lord Vishnu. The Chalisa consists of forty verses that glorify Lord Krishna’s divine qualities, teachings, childhood pastimes, compassion, wisdom, and role as the protector of devotees.
The hymn serves as a powerful medium of devotion and remembrance, helping devotees connect with Lord Krishna through prayer and contemplation.

भगवान श्रीकृष्ण चालीसा पाठ
Krishna Chalisa in Hindi Lyrics

॥ दोहा ॥

बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम ।

अरुण अधर जनु बिम्बा फल, नयन कमल अभिराम ॥

पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख, पिताम्बर शुभ साज ।

जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज ॥

॥ चौपाई ॥

जय यदुनन्दन जय जगवन्दन । जय वसुदेव देवकी नन्दन ॥

जय यशुदा सुत नन्द दुलारे । जय प्रभु भक्तन के दृग तारे ॥

जय नट-नागर नाग नथैया । कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया ॥

पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो । आओ दीनन कष्ट निवारो ॥

वंशी मधुर अधर धरी तेरी । होवे पूर्ण मनोरथ मेरो ॥

आओ हरि पुनि माखन चाखो । आज लाज भारत की राखो ॥

गोल कपोल, चिबुक अरुणारे । मृदु मुस्कान मोहिनी डारे ॥

रंजित राजिव नयन विशाला । मोर मुकुट वैजयंती माला ॥

कुण्डल श्रवण पीतपट आछे l कटि किंकणी काछन काछे ॥

नील जलज सुन्दर तनु सोहे । छवि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे ॥

मस्तक तिलक, अलक घुंघराले । आओ कृष्ण बांसुरी वाले ॥

करि पय पान, पुतनहि तारयो । अका बका कागासुर मारयो ॥

मधुवन जलत अग्नि जब ज्वाला । भै शीतल, लखितहिं नन्दलाला ॥

सुरपति जब ब्रज चढ़यो रिसाई । मसूर धार वारि वर्षाई ॥

लगत-लगत ब्रज चहन बहायो । गोवर्धन नखधारि बचायो ॥

लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई । मुख महं चौदह भुवन दिखाई ॥

दुष्ट कंस अति उधम मचायो । कोटि कमल जब फूल मंगायो ॥

नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें । चरणचिन्ह दै निर्भय किन्हें ॥

करि गोपिन संग रास विलासा । सबकी पूरण करी अभिलाषा ॥

केतिक महा असुर संहारयो । कंसहि केस पकड़ि दै मारयो ॥

मात-पिता की बन्दि छुड़ाई । उग्रसेन कहं राज दिलाई ॥

महि से मृतक छहों सुत लायो । मातु देवकी शोक मिटायो ॥

भौमासुर मुर दैत्य संहारी । लाये षट दश सहसकुमारी ॥

दै भिन्हीं तृण चीर सहारा । जरासिंधु राक्षस कहं मारा ॥

असुर बकासुर आदिक मारयो । भक्तन के तब कष्ट निवारियो ॥

दीन सुदामा के दुःख टारयो । तंदुल तीन मूंठ मुख डारयो ॥

प्रेम के साग विदुर घर मांगे । दुर्योधन के मेवा त्यागे ॥

लखि प्रेम की महिमा भारी । ऐसे श्याम दीन हितकारी ॥

भारत के पारथ रथ हांके । लिए चक्र कर नहिं बल ताके ॥

निज गीता के ज्ञान सुनाये । भक्तन ह्रदय सुधा वर्षाये ॥

मीरा थी ऐसी मतवाली । विष पी गई बजाकर ताली ॥

राना भेजा सांप पिटारी । शालिग्राम बने बनवारी ॥

निज माया तुम विधिहिं दिखायो । उर ते संशय सकल मिटायो ॥

तब शत निन्दा करी तत्काला । जीवन मुक्त भयो शिशुपाला ॥

जबहिं द्रौपदी टेर लगाई । दीनानाथ लाज अब जाई ॥

तुरतहिं वसन बने ननन्दलाला । बढ़े चीर भै अरि मुँह काला ॥

अस नाथ के नाथ कन्हैया । डूबत भंवर बचावत नैया ॥

सुन्दरदास आस उर धारी । दयादृष्टि कीजै बनवारी ॥

नाथ सकल मम कुमति निवारो । क्षमहु बेगि अपराध हमारो ॥

खोलो पट अब दर्शन दीजै । बोलो कृष्ण कन्हैया की जै ॥

॥ दोहा ॥

यह चालीसा कृष्ण का, पाठ करै उर धारि ।

अष्ट सिद्धि नवनिधि फल, लहै पदारथ चारि ॥

श्री विष्णु चालीसा
श्री कृष्ण चालीसा
श्री नरसिंह चालीसा
पितर चालीसा
પિતર ચાલીસા
खाटू श्याम चालीसा

Religious Significance of Krishna Chalisa

In Hindu tradition, Lord Krishna is worshipped as the Supreme Divine who guides humanity through righteousness, devotion, and wisdom.

Krishna Chalisa highlights:

Krishna’s divine childhood in Vrindavan.
His role as the teacher of the Bhagavad Gita.
His protection of devotees.
His compassion and divine grace.
The path of devotion (Bhakti Yoga).

The Chalisa is widely recited in homes, temples, and devotional gatherings.

Benefits of Reciting Krishna Chalisa

1. Strengthens Devotion
Regular recitation helps deepen love and devotion toward Lord Krishna.

2. Promotes Inner Peace
The sacred verses create a calm and spiritually uplifting atmosphere.

3. Enhances Spiritual Growth
The teachings and qualities described in the Chalisa inspire self-improvement and spiritual awareness.

4. Encourages Positive Thinking
Devotees often experience increased faith, optimism, and emotional balance.

5. Supports Daily Worship
Krishna Chalisa is commonly included in daily prayer and meditation routines.

When Should Krishna Chalisa Be Recited?

Krishna Chalisa can be recited:

Daily during morning prayers
On Janmashtami
During Ekadashi observances
On Thursdays
During Krishna Puja
During devotional gatherings and satsangs

How to Recite Krishna Chalisa

  • Take a bath and wear clean clothes.
  • Sit before an image or idol of Lord Krishna.
  • Offer flowers and light a lamp.
  • Recite Krishna Chalisa with devotion and concentration.
  • Conclude with prayer and gratitude.
  • Krishna Chalisa and Krishna Worship

Krishna Chalisa is often recited along with:

Bhagavad Gita
Krishna Ashtakam
Vishnu Sahasranamam
Govinda Namavali
Narayana Stotram
Krishna Mantras

These sacred texts help devotees strengthen their spiritual connection with Lord Krishna.

Frequently Asked Questions (FAQ)

1. What is Krishna Chalisa?
Krishna Chalisa is a devotional hymn of forty verses dedicated to Lord Krishna.

2. What are the benefits of reciting Krishna Chalisa?
Devotees believe it promotes devotion, peace of mind, spiritual growth, and positive thinking.

3. Can Krishna Chalisa be recited daily?
Yes, many devotees recite Krishna Chalisa every day as part of their spiritual practice.

4. What is the best time to read Krishna Chalisa?
Morning prayer time, Janmashtami, and Krishna worship sessions are considered highly auspicious.

5. Is Krishna Chalisa dedicated to Lord Krishna?
Yes, the Chalisa is entirely devoted to the praise and worship of Lord Krishna.

6. Can beginners recite Krishna Chalisa?
Yes, beginners can easily recite Krishna Chalisa with devotion.

7. Is Krishna Chalisa useful for meditation?
Yes, many devotees use it to focus the mind and deepen spiritual awareness.

8. Can Krishna Chalisa be recited on Janmashtami?
Yes, Janmashtami is one of the most important occasions for reciting Krishna Chalisa.

9. Is Krishna Chalisa different from Krishna Ashtakam?
Yes, Krishna Chalisa contains forty verses, while Krishna Ashtakam consists of eight devotional verses.

10. Can Krishna Chalisa be recited with Vishnu Sahasranamam?
Yes, many devotees include both in their daily worship routine.

11. Does Krishna Chalisa mention Krishna’s childhood pastimes?
Yes, many versions of Krishna Chalisa glorify Krishna’s childhood activities and divine leelas.

12. Can Krishna Chalisa strengthen devotion to Lord Krishna?
Yes, regular recitation is believed to increase devotion, faith, and spiritual connection with Lord Krishna.

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Shri Vishnu Chalisa in Hindi Lyrics PDF | श्री विष्णु चालीसा

Shri Vishnu Chalisa | Meaning, Benefits & Spiritual Importance

What is Shri Vishnu Chalisa?

Shri Vishnu Chalisa is a sacred devotional hymn dedicated to Lord Vishnu, the preserver and protector in Hinduism.

The Chalisa praises the divine qualities, powers, and blessings of Lord Vishnu and is recited by devotees during prayer, meditation, bhajans, and Vishnu worship.

Devotees chant Shri Vishnu Chalisa to seek peace, positivity, spiritual growth, protection, and divine blessings.

Shri Vishnu Chalisa in Hindi Lyrics

।।दोहा।।

विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।
कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ॥

।।चौपाई।।

नमो विष्णु भगवान खरारी,कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी,त्रिभुवन फैल रही उजियारी ॥1॥

सुन्दर रूप मनोहर सूरत,सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
तन पर पीताम्बर अति सोहत,बैजन्ती माला मन मोहत ॥2॥

शंख चक्र कर गदा बिराजे,देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
सत्य धर्म मद लोभ न गाजे,काम क्रोध मद लोभ न छाजे ॥3॥

सन्तभक्त सज्जन मनरंजन,दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
सुख उपजाय कष्ट सब भंजन,दोष मिटाय करत जन सज्जन ॥4॥

पाप काट भव सिन्धु उतारण,कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
करत अनेक रूप प्रभु धारण,केवल आप भक्ति के कारण ॥5॥

धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा,तब तुम रूप राम का धारा ।
भार उतार असुर दल मारा,रावण आदिक को संहारा ॥6॥

आप वाराह रूप बनाया,हरण्याक्ष को मार गिराया ।
धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया,चौदह रतनन को निकलाया ॥7॥

अमिलख असुरन द्वन्द मचाया,रूप मोहनी आप दिखाया ।
देवन को अमृत पान कराया,असुरन को छवि से बहलाया ॥8॥

कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया,मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
शंकर का तुम फन्द छुड़ाया,भस्मासुर को रूप दिखाया ॥9॥

वेदन को जब असुर डुबाया,कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
मोहित बनकर खलहि नचाया,उसही कर से भस्म कराया ॥10॥

असुर जलन्धर अति बलदाई,शंकर से उन कीन्ह लडाई ।
हार पार शिव सकल बनाई,कीन सती से छल खल जाई ॥11॥

सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी,बतलाई सब विपत कहानी ।
तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी,वृन्दा की सब सुरति भुलानी ॥12॥

देखत तीन दनुज शैतानी,वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।
हो स्पर्श धर्म क्षति मानी,हना असुर उर शिव शैतानी ॥13॥

तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे,हिरणाकुश आदिक खल मारे ।
गणिका और अजामिल तारे,बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे ॥14॥

हरहु सकल संताप हमारे,कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।
देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे,दीन बन्धु भक्तन हितकारे ॥15॥

चहत आपका सेवक दर्शन,करहु दया अपनी मधुसूदन ।
जानूं नहीं योग्य जब पूजन,होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ॥16॥

शीलदया सन्तोष सुलक्षण,विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।
करहुं आपका किस विधि पूजन,कुमति विलोक होत दुख भीषण ॥17॥

करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण,कौन भांति मैं करहु समर्पण ।
सुर मुनि करत सदा सेवकाईहर्षित रहत परम गति पाई ॥18॥

दीन दुखिन पर सदा सहाई,निज जन जान लेव अपनाई ।
पाप दोष संताप नशाओ,भव बन्धन से मुक्त कराओ ॥19॥

सुत सम्पति दे सुख उपजाओ,निज चरनन का दास बनाओ ।
निगम सदा ये विनय सुनावै,पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै ॥20॥

 
श्री विष्णु चालीसा
श्री कृष्ण चालीसा
श्री नरसिंह चालीसा
पितर चालीसा
પિતર ચાલીસા
खाटू श्याम चालीसा
 

Spiritual Significance of Shri Vishnu Chalisa

Lord Vishnu is worshipped as the protector and sustainer of the universe.

Shri Vishnu Chalisa is spiritually important because devotees believe it:

Brings peace and positivity
Strengthens devotion and faith
Creates mental calmness
Promotes spiritual growth
Invites divine blessings into life

Benefits of Chanting Shri Vishnu Chalisa

1. Brings Mental Peace

Regular chanting helps devotees feel emotionally calm and spiritually balanced.

2. Strengthens Devotion

The Chalisa deepens faith and connection with Lord Vishnu.

3. Creates Positive Energy

Many devotees believe Vishnu Chalisa creates positivity and spiritual harmony.

4. Helps During Difficult Times

Devotees chant Vishnu Chalisa for courage, protection, and divine guidance.

5. Enhances Spiritual Practice

The Chalisa supports meditation, bhakti, and spiritual discipline.

Best Time to Chant Shri Vishnu Chalisa

The most auspicious times include:

Early morning
During meditation
Thursdays
Ekadashi
During Vishnu Puja and bhajans

Shri Vishnu Chalisa PDF Download

Many devotees search for Shri Vishnu Chalisa PDF versions for:

Daily chanting
Temple worship
Offline reading
Spiritual study
Family prayer sessions

Frequently Asked Questions (FAQ)

1. What is Shri Vishnu Chalisa?

Shri Vishnu Chalisa is a devotional hymn dedicated to Lord Vishnu.

2. What are the benefits of chanting Vishnu Chalisa?

Devotees believe it brings peace, positivity, devotion, and spiritual strength.

3. Can Vishnu Chalisa be chanted daily?

Yes, many devotees chant Vishnu Chalisa daily during prayer and worship.

4. When should Vishnu Chalisa be chanted?

It is commonly chanted in the morning, during meditation, and on Thursdays or Ekadashi.

5. Is Vishnu Chalisa related to Lord Vishnu?

Yes, the Chalisa is dedicated to Lord Vishnu and his divine qualities.

6. Can women chant Vishnu Chalisa?

Yes, both men and women can chant Vishnu Chalisa.

7. Where can I download Vishnu Chalisa PDF?

Many devotional websites provide downloadable PDF versions.

8. Is Vishnu Chalisa good for mental peace?

Many devotees believe regular chanting creates emotional calmness and positivity.

9. Can students chant Vishnu Chalisa?

Yes, students and devotees chant it for focus, positivity, and spiritual confidence.

10. How long does Vishnu Chalisa take to recite?

The Chalisa usually takes around 5 to 10 minutes to recite.

11. Is Vishnu Chalisa important during Ekadashi?

Yes, Ekadashi is considered highly auspicious for Lord Vishnu worship and chanting.

12. Can Vishnu Chalisa be recited during Vishnu Puja?

Yes, devotees commonly recite the Chalisa during Vishnu Puja and bhajans.

Shri Vishnu Chalisa in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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Pitar Chalisa in Gujarati PDF

પિત્ર ચાલીસાનું આધ્યાત્મિક મહત્વ: પૂર્વજોના ધાર્મિક વિધિઓ અને આશીર્વાદ

પિત્ર ચાલીસા એ હિંદુ ધર્મમાં પૂર્વજો (પિત્રો) ને સમર્પિત ભક્તિ પાઠ છે. તે કોઈના પૂર્વજોની આત્માઓનું સન્માન કરવા અને આશીર્વાદ મેળવવા માટે વાંચવામાં આવે છે, જેઓ પરિવારની આધ્યાત્મિક અને ભૌતિક સુખાકારીમાં મહત્વપૂર્ણ ભૂમિકા ભજવે છે તેવું માનવામાં આવે છે. આ પોસ્ટ પિત્ર ચાલીસાનું મહત્વ, તેના ફાયદા, તેની સાથે સંકળાયેલી ધાર્મિક વિધિઓ અને તેના પાલન માટેની શુભ તારીખો અને મુહૂર્ત સહિતની ચોક્કસ વિગતો સમજાવે છે.

પિતર ચાલીસા ગુજરાતીમાં

।। दोहा ।।

हे पितरेश्वर आपको दे दियो आशीर्वाद
चरणाशीश नवा दियो रखदो सिर पर हाथ
सबसे पहले गणपत पाछे घर का देव मनावा जी
हे पितरेश्वर दया राखियो, करियो मन की चाया जी ।।

।। चौपाई ।।

पितरेश्वर करो मार्ग उजागर
चरण रज की मुक्ति सागर

परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा
मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा

मातृ-पितृ देव मन जो भावे
सोई अमित जीवन फल पावे

जै-जै-जै पित्तर जी साईं
पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं

चारों ओर प्रताप तुम्हारा
संकट में तेरा ही सहारा

नारायण आधार सृष्टि का
पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का

प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते
भाग्य द्वार आप ही खुलवाते

झुंझनू में दरबार है साजे
सब देवों संग आप विराजे

प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा
कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा

पित्तर महिमा सबसे न्यारी
जिसका गुणगावे नर नारी

तीन मण्ड में आप बिराजे
बसु रुद्र आदित्य में साजे

नाथ सकल संपदा तुम्हारी
मैं सेवक समेत सुत नारी

छप्पन भोग नहीं हैं भाते
शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते

तुम्हारे भजन परम हितकारी
छोटे बड़े सभी अधिकारी

भानु उदय संग आप पुजावै
पांच अँजुलि जल रिझावे

ध्वज पताका मण्ड पे है साजे
अखण्ड ज्योति में आप विराजे

सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी
धन्य हुई जन्म भूमि हमारी

शहीद हमारे यहाँ पुजाते
मातृ भक्ति संदेश सुनाते

जगत पित्तरो सिद्धान्त हमारा
धर्म जाति का नहीं है नारा

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
सब पूजे पित्तर भाई

हिन्दू वंश वृक्ष है हमारा
जान से ज्यादा हमको प्यारा

गंगा ये मरुप्रदेश की
पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की

बन्धु छोड़ ना इनके चरणाँ
इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा

चौदस को जागरण करवाते
अमावस को हम धोक लगाते

जात जडूला सभी मनाते
नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते

धन्य जन्म भूमि का वो फूल है
जिसे पितृ मण्डल की मिली धूल है

श्री पित्तर जी भक्त हितकारी
सुन लीजे प्रभु अरज हमारी

निशिदिन ध्यान धरे जो कोई
ता सम भक्त और नहीं कोई

तुम अनाथ के नाथ सहाई
दीनन के हो तुम सदा सहाई

चारिक वेद प्रभु के साखी
तुम भक्तन की लज्जा राखी

नाम तुम्हारो लेत जो कोई
ता सम धन्य और नहीं कोई

जो तुम्हारे नित पाँव पलोटत
नवों सिद्धि चरणा में लोटत

सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी
जो तुम पे जावे बलिहारी

जो तुम्हारे चरणा चित्त लावे
ताकी मुक्ति अवसी हो जावे

सत्य भजन तुम्हारो जो गावे
सो निश्चय चारों फल पावे

तुमहिं देव कुलदेव हमारे
तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे

सत्य आस मन में जो होई
मनवांछित फल पावें सोई

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई
शेष सहस्र मुख सके न गाई

मैं अतिदीन मलीन दुखारी
करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी

अब पित्तर जी दया दीन पर कीजै
अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै

।। दोहा ।।

पित्तरों को स्थान दो, तीरथ और स्वयं ग्राम
श्रद्धा सुमन चढ़ें वहां, पूरण हो सब काम

झुंझनू धाम विराजे हैं, पित्तर हमारे महान
दर्शन से जीवन सफल हो, पूजे सकल जहान

जीवन सफल जो चाहिए, चले झुंझनू धाम
पित्तर चरण की धूल ले, हो जीवन सफल महान

/ इति पितर चालीसा समाप्त /

श्री विष्णु चालीसा
श्री कृष्ण चालीसा
श्री नरसिंह चालीसा
पितर चालीसा
પિતર ચાલીસા
खाटू श्याम चालीसा

પિત્ર ચાલીસાનું મહત્વ

હિન્દુ માન્યતાઓમાં, પૂર્વજો આદરનું સ્થાન ધરાવે છે અને તેમના આશીર્વાદને સમૃદ્ધ અને અવરોધ-મુક્ત જીવન માટે આવશ્યક માનવામાં આવે છે. પિત્ર ચાલીસા એ પૂર્વજોના ક્ષેત્ર સાથે જોડાવા, સુમેળભર્યા પારિવારિક જીવન અને આધ્યાત્મિક વિકાસને પ્રોત્સાહન આપવાનું એક શક્તિશાળી આધ્યાત્મિક સાધન છે. તે કૃતજ્ઞતા વ્યક્ત કરવાનો અને પૂર્વજો પાસેથી માર્ગદર્શન મેળવવાનું એક પ્રકાર છે, જેનાથી ઘર પર તેમના સતત આશીર્વાદની ખાતરી થાય છે.

પિતૃ ચાલીસાના પાઠ કરવાથી લાભ થાય છે

આધ્યાત્મિક જોડાણ: જીવંત પરિવારના સભ્યો અને તેમના પૂર્વજો વચ્ચેના બંધનને મજબૂત બનાવે છે, હકારાત્મક ઊર્જાનો સતત પ્રવાહ સુનિશ્ચિત કરે છે.
પૂર્વજોના કર્મોથી રક્ષણ: વર્તમાન પરિવારના સભ્યો પર પૂર્વજોના ભૂતકાળના કર્મના દેવાની અસર ઘટાડવામાં મદદ કરે છે.
સુમેળ અને સમૃદ્ધિ: નિયમિત પાઠ કરવાથી પૂર્વજોને પ્રસન્ન કરીને પરિવારમાં સુમેળ, સુખ અને સમૃદ્ધિ લાવી શકાય છે.

પૂર્વજો માટે ધાર્મિક વિધિઓ

પિત્ર ચાલીસાનું પઠન સામાન્ય રીતે પિતૃ પક્ષ દરમિયાન કરવામાં આવે છે, જ્યારે હિંદુઓ તેમના પૂર્વજોને શ્રદ્ધાંજલિ આપે છે. ધાર્મિક વિધિઓમાં શામેલ છે:
તર્પણઃ પિતૃઓની આત્માઓને તૃપ્ત કરવા માટે તેમને પાણીમાં કાળા તલ ભેળવીને તર્પણ અર્પણ કરવું જોઈએ.
શ્રાદ્ધ: ધાર્મિક વિધિઓ કરવી જેમાં પિંડા દાન (ચોખાના ગોળા અર્પણ) અને બ્રાહ્મણોને ભોજનનો સમાવેશ થાય છે.
પિત્ર ચાલીસાનું પઠન: મૃત પૂર્વજોના ફોટોગ્રાફ્સ અથવા પ્રતીકાત્મક રજૂઆતો સાથે કરવામાં આવે છે.

પિતૃ સ્તોત્રનો પાઠ: 

પિતૃ પક્ષ 2026 તારીખ અને સમય

પૂર્વજોના આશીર્વાદ | પૂર્વજોના કાર્યો

પિતૃ સ્તોત્ર

પિતૃ આરતી

પિતર ચાલીસા ગુજરાતીમાં પીડીએફ ડાઉનલોડ કરો

Pitar Chalisa in Bengali PDF

পিত্র চালিসার আধ্যাত্মিক তাৎপর্য: পূর্বপুরুষদের আচার ও আশীর্বাদ

পিত্র চালিসা একটি ভক্তিমূলক পাঠ্য যা হিন্দুধর্মের পূর্বপুরুষদের (পিত্রদের) উদ্দেশ্যে নিবেদিত। এটি একজনের পূর্বপুরুষদের আত্মাকে সম্মান জানাতে এবং তাদের কাছ থেকে আশীর্বাদ পাওয়ার জন্য পঠিত হয়, যারা পরিবারের আধ্যাত্মিক এবং বস্তুগত সুস্থতায় গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করে বলে বিশ্বাস করা হয়। এই পোস্টটি পিত্র চালিসার গুরুত্ব, এর উপকারিতা, এর সাথে সম্পর্কিত আচার এবং এর পালনের জন্য শুভ তারিখ এবং মুহুর্ত সহ নির্দিষ্ট বিবরণ ব্যাখ্যা করে।

বাংলায় পিতর চালিসা

।। दोहा ।।

हे पितरेश्वर आपको दे दियो आशीर्वाद
चरणाशीश नवा दियो रखदो सिर पर हाथ
सबसे पहले गणपत पाछे घर का देव मनावा जी
हे पितरेश्वर दया राखियो, करियो मन की चाया जी ।।

।। चौपाई ।।

पितरेश्वर करो मार्ग उजागर
चरण रज की मुक्ति सागर

परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा
मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा

मातृ-पितृ देव मन जो भावे
सोई अमित जीवन फल पावे

जै-जै-जै पित्तर जी साईं
पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं

चारों ओर प्रताप तुम्हारा
संकट में तेरा ही सहारा

नारायण आधार सृष्टि का
पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का

प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते
भाग्य द्वार आप ही खुलवाते

झुंझनू में दरबार है साजे
सब देवों संग आप विराजे

प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा
कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा

पित्तर महिमा सबसे न्यारी
जिसका गुणगावे नर नारी

तीन मण्ड में आप बिराजे
बसु रुद्र आदित्य में साजे

नाथ सकल संपदा तुम्हारी
मैं सेवक समेत सुत नारी

छप्पन भोग नहीं हैं भाते
शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते

तुम्हारे भजन परम हितकारी
छोटे बड़े सभी अधिकारी

भानु उदय संग आप पुजावै
पांच अँजुलि जल रिझावे

ध्वज पताका मण्ड पे है साजे
अखण्ड ज्योति में आप विराजे

सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी
धन्य हुई जन्म भूमि हमारी

शहीद हमारे यहाँ पुजाते
मातृ भक्ति संदेश सुनाते

जगत पित्तरो सिद्धान्त हमारा
धर्म जाति का नहीं है नारा

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
सब पूजे पित्तर भाई

हिन्दू वंश वृक्ष है हमारा
जान से ज्यादा हमको प्यारा

गंगा ये मरुप्रदेश की
पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की

बन्धु छोड़ ना इनके चरणाँ
इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा

चौदस को जागरण करवाते
अमावस को हम धोक लगाते

जात जडूला सभी मनाते
नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते

धन्य जन्म भूमि का वो फूल है
जिसे पितृ मण्डल की मिली धूल है

श्री पित्तर जी भक्त हितकारी
सुन लीजे प्रभु अरज हमारी

निशिदिन ध्यान धरे जो कोई
ता सम भक्त और नहीं कोई

तुम अनाथ के नाथ सहाई
दीनन के हो तुम सदा सहाई

चारिक वेद प्रभु के साखी
तुम भक्तन की लज्जा राखी

नाम तुम्हारो लेत जो कोई
ता सम धन्य और नहीं कोई

जो तुम्हारे नित पाँव पलोटत
नवों सिद्धि चरणा में लोटत

सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी
जो तुम पे जावे बलिहारी

जो तुम्हारे चरणा चित्त लावे
ताकी मुक्ति अवसी हो जावे

सत्य भजन तुम्हारो जो गावे
सो निश्चय चारों फल पावे

तुमहिं देव कुलदेव हमारे
तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे

सत्य आस मन में जो होई
मनवांछित फल पावें सोई

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई
शेष सहस्र मुख सके न गाई

मैं अतिदीन मलीन दुखारी
करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी

अब पित्तर जी दया दीन पर कीजै
अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै

।। दोहा ।।

पित्तरों को स्थान दो, तीरथ और स्वयं ग्राम
श्रद्धा सुमन चढ़ें वहां, पूरण हो सब काम

झुंझनू धाम विराजे हैं, पित्तर हमारे महान
दर्शन से जीवन सफल हो, पूजे सकल जहान

जीवन सफल जो चाहिए, चले झुंझनू धाम
पित्तर चरण की धूल ले, हो जीवन सफल महान

/ इति पितर चालीसा समाप्त /

পিত্র চালিসার গুরুত্ব

হিন্দু বিশ্বাসে, পূর্বপুরুষরা একটি শ্রদ্ধার স্থান ধারণ করে এবং তাদের আশীর্বাদকে একটি সমৃদ্ধ এবং বাধা-মুক্ত জীবনের জন্য অপরিহার্য বলে মনে করা হয়। পিত্র চালিসা হল একটি শক্তিশালী আধ্যাত্মিক হাতিয়ার যা পৈতৃক রাজ্যের সাথে সংযোগ স্থাপন, সুসংগত পারিবারিক জীবন এবং আধ্যাত্মিক বৃদ্ধির প্রচার করে। এটি কৃতজ্ঞতা প্রকাশ করার এবং পূর্বপুরুষদের কাছ থেকে নির্দেশনা চাওয়ার একটি রূপ, যার ফলে বাড়িতে তাদের অব্যাহত আশীর্বাদ নিশ্চিত করা হয়।

পিত্র চালিসা পাঠের উপকারিতা

আধ্যাত্মিক সংযোগ: জীবিত পরিবারের সদস্যদের এবং তাদের পূর্বপুরুষদের মধ্যে বন্ধনকে শক্তিশালী করে, ইতিবাচক শক্তির স্থির প্রবাহ নিশ্চিত করে।
পূর্বপুরুষের কর্ম থেকে সুরক্ষা: বর্তমান পরিবারের সদস্যদের উপর পূর্বপুরুষদের অতীত কর্ম্ম ঋণের প্রভাব কমাতে সাহায্য করে।
সম্প্রীতি ও সমৃদ্ধি: নিয়মিত পাঠ করলে পূর্বপুরুষদের খুশি করে পরিবারে সৌহার্দ্য, সুখ ও সমৃদ্ধি আসতে পারে।

পূর্বপুরুষদের জন্য আচার অনুষ্ঠান

পিত্র চালিসা সাধারণত পিতৃপক্ষের সময় পাঠ করা হয়, সেই সময়কালে যখন হিন্দুরা তাদের পূর্বপুরুষদের শ্রদ্ধা জানায়। আচারের মধ্যে রয়েছে:
তর্পণ: পূর্বপুরুষদের আত্মাকে সন্তুষ্ট করতে জলে কালো তিল মিশিয়ে তর্পণ নিবেদন করা উচিত।
শ্রাদ্ধ: পিন্ড দান (চালের বল নিবেদন) এবং ব্রাহ্মণদের খাবারের অন্তর্ভুক্ত অনুষ্ঠান সম্পাদন করা।
পিত্র চালিসা পাঠ: মৃত পূর্বপুরুষদের ফটোগ্রাফ বা প্রতীকী উপস্থাপনা দিয়ে করা হয়।
পিত্র স্তোত্র পাঠ: 

পিতৃপক্ষ 2026 তারিখ এবং সময়

পূর্বপুরুষদের আশীর্বাদ। পূর্বপুরুষের কাজ

পিতৃ স্তোত্র

পিতর আরতি

পিতর চালিসা বাংলায় পিডিএফ ডাউনলোড করুন

श्री नरसिंह चालीसा | Narsingh Chalisa Lyrics in Hindi PDF

नरसिंह चालीसा की शक्ति का अनावरण: एक आध्यात्मिक यात्रा

Narsingh Chalisa is a devotional hymn dedicated to Lord Narsingh, a fierce avatar of Lord Vishnu, who symbolizes divine anger and protection. This powerful chant is part of Hindu mythology and is recited by devotees to seek blessings and protection from evil forces. In this article, we explore the significance of Narsingh Chalisa, its benefits, the rituals involved, and the deeper spiritual implications of this sacred hymn.

Narsingh Chalisa Hindi Lyrics

मास वैशाख कृतिका युत हरण मही को भार ।
शुक्ल चतुर्दशी सोम दिन लियो नरसिंह अवतार ।।
धन्य तुम्हारो सिंह तनु, धन्य तुम्हारो नाम ।
तुमरे सुमरन से प्रभु , पूरन हो सब काम ।।

नरसिंह देव में सुमरों तोहि ,
धन बल विद्या दान दे मोहि ।।1।।
जय जय नरसिंह कृपाला
करो सदा भक्तन प्रतिपाला ।।२ ।।
विष्णु के अवतार दयाला
महाकाल कालन को काला ।।३ ।।
नाम अनेक तुम्हारो बखानो
अल्प बुद्धि में ना कछु जानों ।।४।।
हिरणाकुश नृप अति अभिमानी
तेहि के भार मही अकुलानी ।।५।।
हिरणाकुश कयाधू के जाये
नाम भक्त प्रहलाद कहाये ।।६।।
भक्त बना बिष्णु को दासा
पिता कियो मारन परसाया ।।७।।
अस्त्र-शस्त्र मारे भुज दण्डा
अग्निदाह कियो प्रचंडा ।।८।।
भक्त हेतु तुम लियो अवतारा
दुष्ट-दलन हरण महिभारा ।।९।।
तुम भक्तन के भक्त तुम्हारे
प्रह्लाद के प्राण पियारे ।।१०।।
प्रगट भये फाड़कर तुम खम्भा
देख दुष्ट-दल भये अचंभा ।।११।।
खड्ग जिह्व तनु सुंदर साजा
ऊर्ध्व केश महादष्ट्र विराजा ।।12।।
तप्त स्वर्ण सम बदन तुम्हारा
को वरने तुम्हरों विस्तारा ।।13।।
रूप चतुर्भुज बदन विशाला
नख जिह्वा है अति विकराला ।।14।।
स्वर्ण मुकुट बदन अति भारी
कानन कुंडल की छवि न्यारी ।।15।।
भक्त प्रहलाद को तुमने उबारा
हिरणा कुश खल क्षण मह मारा ।।१६।।
ब्रह्मा, बिष्णु तुम्हे नित ध्यावे
इंद्र महेश सदा मन लावे ।।१७।।
वेद पुराण तुम्हरो यश गावे
शेष शारदा पारन पावे ।।१८।।
जो नर धरो तुम्हरो ध्याना
ताको होय सदा कल्याना ।।१९।।
त्राहि-त्राहि प्रभु दुःख निवारो
भव बंधन प्रभु आप ही टारो ।।२०।।
नित्य जपे जो नाम तिहारा
दुःख व्याधि हो निस्तारा ।।२१।।
संतान-हीन जो जाप कराये
मन इच्छित सो नर सुत पावे ।।२२।।
बंध्या नारी सुसंतान को पावे
नर दरिद्र धनी होई जावे ।।२३।।
जो नरसिंह का जाप करावे
ताहि विपत्ति सपनें नही आवे ।।२४।।
जो कामना करे मन माही
सब निश्चय सो सिद्ध हुई जाही ।।२५।।
जीवन मैं जो कछु संकट होई
निश्चय नरसिंह सुमरे सोई ।।२६ ।।
रोग ग्रसित जो ध्यावे कोई
ताकि काया कंचन होई ।।२७।।
डाकिनी-शाकिनी प्रेत बेताला
ग्रह-व्याधि अरु यम विकराला ।।२८।।
प्रेत पिशाच सबे भय खाए
यम के दूत निकट नहीं आवे ।।२९।।
सुमर नाम व्याधि सब भागे
रोग-शोक कबहूं नही लागे ।।३०।।
जाको नजर दोष हो भाई
सो नरसिंह चालीसा गाई ।।३१।।
हटे नजर होवे कल्याना
बचन सत्य साखी भगवाना ।।३२।।
जो नर ध्यान तुम्हारो लावे
सो नर मन वांछित फल पावे ।।३३।।
बनवाए जो मंदिर ज्ञानी
हो जावे वह नर जग मानी ।।३४।।
नित-प्रति पाठ करे इक बारा
सो नर रहे तुम्हारा प्यारा ।।३५।।
नरसिंह चालीसा जो जन गावे
दुःख दरिद्र ताके निकट न आवे ।।३६।।
चालीसा जो नर पढ़े-पढ़ावे
सो नर जग में सब कुछ पावे ।।37।।
यह श्री नरसिंह चालीसा
पढ़े रंक होवे अवनीसा ।।३८।।
जो ध्यावे सो नर सुख पावे
तोही विमुख बहु दुःख उठावे ।।३९।।
“शिव स्वरूप है शरण तुम्हारी
हरो नाथ सब विपत्ति हमारी “।।४० ।।
चारों युग गायें तेरी महिमा अपरम्पार ‍‌‍।
निज भक्तनु के प्राण हित लियो जगत अवतार ।।
नरसिंह चालीसा जो पढ़े प्रेम मगन शत बार ।
उस घर आनंद रहे वैभव बढ़े अपार ।।

।। इति श्री नरसिंह चालीसा संपूर्णम ।।

श्री विष्णु चालीसा
श्री कृष्ण चालीसा
श्री नरसिंह चालीसा
पितर चालीसा
પિતર ચાલીસા
खाटू श्याम चालीसा

Importance and Benefits of Narsingh Chalisa

Reciting Narsingh Chalisa is believed to invoke Lord Narsingh’s protection against dangers and adversaries. It is particularly significant for those facing hardships in life and is thought to:

Provide Protection: Offer shielding from enemies and evil influences.
Instill Courage: Enhance the devotee’s bravery and resilience in the face of challenges.
Purify Karma: Aid in the purification of past karmic debts.
Narsingh Chalisa Rituals and Celebrations

The recitation of Narsingh Chalisa is often accompanied by specific rituals:

Lighting of Lamps: Devotees light oil lamps to symbolize the removal of darkness and ignorance.
Offerings: Sweets, fruits, and flowers are offered to the idol or image of Lord Narsingh.
Mantra Chanting: Alongside the Narsingh Chalisa, mantras like the Narasimha Moola Mantra are chanted to intensify the prayers.

नृसिंह जयंती

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Free Download Narsingh/Narsimha Chalisa in Hindi PDF

 

Pitar Chalisa in Marathi PDF

पितृ चालिसाचे आध्यात्मिक महत्त्व: पूर्वजांचे आशीर्वाद

पित्र चालिसा हा हिंदू धर्मातील पूर्वजांना (पित्रांना) समर्पित केलेला भक्ती ग्रंथ आहे. हे एखाद्याच्या पूर्वजांच्या आत्म्याचा सन्मान करण्यासाठी आणि आशीर्वाद मिळविण्यासाठी वाचले जाते, ज्यांना कुटुंबाच्या आध्यात्मिक आणि भौतिक कल्याणात महत्त्वाची भूमिका बजावली जाते असे मानले जाते. हे पोस्ट पितृ चालिसाचे महत्त्व, त्याचे फायदे, त्याच्याशी संबंधित विधी आणि त्याच्या पालनासाठी शुभ तारखा आणि मुहूर्तांसह विशिष्ट तपशील स्पष्ट करते.

पितर चालीसा मराठीत

।। दोहा ।।

हे पितरेश्वर आपको दे दियो आशीर्वाद
चरणाशीश नवा दियो रखदो सिर पर हाथ
सबसे पहले गणपत पाछे घर का देव मनावा जी
हे पितरेश्वर दया राखियो, करियो मन की चाया जी ।।

।। चौपाई ।।

पितरेश्वर करो मार्ग उजागर
चरण रज की मुक्ति सागर

परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा
मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा

मातृ-पितृ देव मन जो भावे
सोई अमित जीवन फल पावे

जै-जै-जै पित्तर जी साईं
पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं

चारों ओर प्रताप तुम्हारा
संकट में तेरा ही सहारा

नारायण आधार सृष्टि का
पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का

प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते
भाग्य द्वार आप ही खुलवाते

झुंझनू में दरबार है साजे
सब देवों संग आप विराजे

प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा
कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा

पित्तर महिमा सबसे न्यारी
जिसका गुणगावे नर नारी

तीन मण्ड में आप बिराजे
बसु रुद्र आदित्य में साजे

नाथ सकल संपदा तुम्हारी
मैं सेवक समेत सुत नारी

छप्पन भोग नहीं हैं भाते
शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते

तुम्हारे भजन परम हितकारी
छोटे बड़े सभी अधिकारी

भानु उदय संग आप पुजावै
पांच अँजुलि जल रिझावे

ध्वज पताका मण्ड पे है साजे
अखण्ड ज्योति में आप विराजे

सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी
धन्य हुई जन्म भूमि हमारी

शहीद हमारे यहाँ पुजाते
मातृ भक्ति संदेश सुनाते

जगत पित्तरो सिद्धान्त हमारा
धर्म जाति का नहीं है नारा

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
सब पूजे पित्तर भाई

हिन्दू वंश वृक्ष है हमारा
जान से ज्यादा हमको प्यारा

गंगा ये मरुप्रदेश की
पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की

बन्धु छोड़ ना इनके चरणाँ
इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा

चौदस को जागरण करवाते
अमावस को हम धोक लगाते

जात जडूला सभी मनाते
नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते

धन्य जन्म भूमि का वो फूल है
जिसे पितृ मण्डल की मिली धूल है

श्री पित्तर जी भक्त हितकारी
सुन लीजे प्रभु अरज हमारी

निशिदिन ध्यान धरे जो कोई
ता सम भक्त और नहीं कोई

तुम अनाथ के नाथ सहाई
दीनन के हो तुम सदा सहाई

चारिक वेद प्रभु के साखी
तुम भक्तन की लज्जा राखी

नाम तुम्हारो लेत जो कोई
ता सम धन्य और नहीं कोई

जो तुम्हारे नित पाँव पलोटत
नवों सिद्धि चरणा में लोटत

सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी
जो तुम पे जावे बलिहारी

जो तुम्हारे चरणा चित्त लावे
ताकी मुक्ति अवसी हो जावे

सत्य भजन तुम्हारो जो गावे
सो निश्चय चारों फल पावे

तुमहिं देव कुलदेव हमारे
तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे

सत्य आस मन में जो होई
मनवांछित फल पावें सोई

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई
शेष सहस्र मुख सके न गाई

मैं अतिदीन मलीन दुखारी
करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी

अब पित्तर जी दया दीन पर कीजै
अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै

।। दोहा ।।

पित्तरों को स्थान दो, तीरथ और स्वयं ग्राम
श्रद्धा सुमन चढ़ें वहां, पूरण हो सब काम

झुंझनू धाम विराजे हैं, पित्तर हमारे महान
दर्शन से जीवन सफल हो, पूजे सकल जहान

जीवन सफल जो चाहिए, चले झुंझनू धाम
पित्तर चरण की धूल ले, हो जीवन सफल महान

/ इति पितृ चालिसा संपते/

पितृ चालीसाचे महत्त्व

हिंदू श्रद्धेनुसार, पूर्वजांना आदराचे स्थान आहे आणि त्यांचे आशीर्वाद समृद्ध आणि अडथळामुक्त जीवनासाठी आवश्यक मानले जातात. पितृ चालिसा हे वडिलोपार्जित क्षेत्राशी जोडण्यासाठी, सुसंवादी कौटुंबिक जीवन आणि आध्यात्मिक वाढीस प्रोत्साहन देण्यासाठी एक शक्तिशाली आध्यात्मिक साधन आहे. हा कृतज्ञता व्यक्त करण्याचा आणि पूर्वजांकडून मार्गदर्शन मिळविण्याचा एक प्रकार आहे, ज्यामुळे घरावर त्यांचे निरंतर आशीर्वाद सुनिश्चित होतात.

पितृ चालिसा पठणाचे फायदे

अध्यात्मिक कनेक्शन: जिवंत कुटुंबातील सदस्य आणि त्यांचे पूर्वज यांच्यातील बंध मजबूत करते, सकारात्मक उर्जेचा स्थिर प्रवाह सुनिश्चित करते.
पूर्वजांच्या कर्मापासून संरक्षण: सध्याच्या कुटुंबातील सदस्यांवर पूर्वजांच्या भूतकाळातील कर्माचा प्रभाव कमी करण्यास मदत होते.
सुसंवाद आणि समृद्धी : नियमित पठण केल्याने पितरांना प्रसन्न करून कुटुंबात सुसंवाद, सुख आणि समृद्धी येऊ शकते.

पूर्वजांसाठी विधी

पितृ चालीसा सामान्यतः पितृ पक्षादरम्यान पाठ केला जातो, ज्या काळात हिंदू त्यांच्या पूर्वजांना श्रद्धांजली अर्पण करतात. विधींमध्ये हे समाविष्ट आहे:
तर्पण : पितरांच्या आत्म्याला तृप्त करण्यासाठी पाण्यात काळे तीळ मिसळून तर्पण अर्पण करावे.
श्राद्ध: पिंड दान (तांदळाचे गोळे अर्पण) आणि ब्राह्मणांना भोजन यांचा समावेश असलेले विधी करणे.
पित्र चालिसाचे पठण: मृत पूर्वजांच्या छायाचित्रे किंवा प्रतिकात्मक प्रतिनिधित्वासह केले जाते.
पितृ स्तोत्राचे पठण: 

पितृ पक्ष 2026 तारीख आणि वेळ

पूर्वजांचा आशीर्वाद. वडिलोपार्जित कृत्ये

पितृ स्तोत्र

पितृ आरती

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पितर चालीसा | Pitar Chalisa in Hindi Lyrics PDF

पितर चालीसा | Meaning, Benefits & Spiritual Importance

पितर चालीसा क्या है?

पितर चालीसा हिंदू धर्म में पितृ देवताओं और पूर्वजों को समर्पित एक पवित्र भक्ति पाठ है। यह चालीसा विशेष रूप से पितृ पक्ष, श्राद्ध, तर्पण और पिंड दान जैसे धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान पढ़ी जाती है।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार पूर्वजों का सम्मान और स्मरण करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। भक्त पितर चालीसा का पाठ पूर्वजों की कृपा, पारिवारिक सुख-शांति और आध्यात्मिक संतुलन के लिए करते हैं।

Pitar Chalisa in Hindi Lyrics

।। दोहा ।।

हे पितरेश्वर आपको दे दियो आशीर्वाद
चरणाशीश नवा दियो रखदो सिर पर हाथ
सबसे पहले गणपत पाछे घर का देव मनावा जी
हे पितरेश्वर दया राखियो, करियो मन की चाया जी ।।

।। चौपाई ।।

पितरेश्वर करो मार्ग उजागर
चरण रज की मुक्ति सागर

परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा
मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा

मातृ-पितृ देव मन जो भावे
सोई अमित जीवन फल पावे

जै-जै-जै पित्तर जी साईं
पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं

चारों ओर प्रताप तुम्हारा
संकट में तेरा ही सहारा

नारायण आधार सृष्टि का
पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का

प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते
भाग्य द्वार आप ही खुलवाते

झुंझनू में दरबार है साजे
सब देवों संग आप विराजे

प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा
कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा

पित्तर महिमा सबसे न्यारी
जिसका गुणगावे नर नारी

तीन मण्ड में आप बिराजे
बसु रुद्र आदित्य में साजे

नाथ सकल संपदा तुम्हारी
मैं सेवक समेत सुत नारी

छप्पन भोग नहीं हैं भाते
शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते

तुम्हारे भजन परम हितकारी
छोटे बड़े सभी अधिकारी

भानु उदय संग आप पुजावै
पांच अँजुलि जल रिझावे

ध्वज पताका मण्ड पे है साजे
अखण्ड ज्योति में आप विराजे

सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी
धन्य हुई जन्म भूमि हमारी

शहीद हमारे यहाँ पुजाते
मातृ भक्ति संदेश सुनाते

जगत पित्तरो सिद्धान्त हमारा
धर्म जाति का नहीं है नारा

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
सब पूजे पित्तर भाई

हिन्दू वंश वृक्ष है हमारा
जान से ज्यादा हमको प्यारा

गंगा ये मरुप्रदेश की
पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की

बन्धु छोड़ ना इनके चरणाँ
इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा

चौदस को जागरण करवाते
अमावस को हम धोक लगाते

जात जडूला सभी मनाते
नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते

धन्य जन्म भूमि का वो फूल है
जिसे पितृ मण्डल की मिली धूल है

श्री पित्तर जी भक्त हितकारी
सुन लीजे प्रभु अरज हमारी

निशिदिन ध्यान धरे जो कोई
ता सम भक्त और नहीं कोई

तुम अनाथ के नाथ सहाई
दीनन के हो तुम सदा सहाई

चारिक वेद प्रभु के साखी
तुम भक्तन की लज्जा राखी

नाम तुम्हारो लेत जो कोई
ता सम धन्य और नहीं कोई

जो तुम्हारे नित पाँव पलोटत
नवों सिद्धि चरणा में लोटत

सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी
जो तुम पे जावे बलिहारी

जो तुम्हारे चरणा चित्त लावे
ताकी मुक्ति अवसी हो जावे

सत्य भजन तुम्हारो जो गावे
सो निश्चय चारों फल पावे

तुमहिं देव कुलदेव हमारे
तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे

सत्य आस मन में जो होई
मनवांछित फल पावें सोई

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई
शेष सहस्र मुख सके न गाई

मैं अतिदीन मलीन दुखारी
करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी

अब पित्तर जी दया दीन पर कीजै
अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै

।। दोहा ।।

पित्तरों को स्थान दो, तीरथ और स्वयं ग्राम
श्रद्धा सुमन चढ़ें वहां, पूरण हो सब काम

झुंझनू धाम विराजे हैं, पित्तर हमारे महान
दर्शन से जीवन सफल हो, पूजे सकल जहान

जीवन सफल जो चाहिए, चले झुंझनू धाम
पित्तर चरण की धूल ले, हो जीवन सफल महान

/ इति पितर चालीसा समाप्त /

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पितर चालीसा का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में पितरों को परिवार का अदृश्य रक्षक माना जाता है।

पितर चालीसा का महत्व इसलिए माना जाता है क्योंकि भक्तों के अनुसार यह:

  • पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करती है
  • पितृ दोष से जुड़ी समस्याओं को कम करने में सहायक मानी जाती है
  • परिवार में सुख-शांति और सकारात्मकता लाती है
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करती है
  • आध्यात्मिक वातावरण बनाती है

पितर चालीसा पढ़ने के लाभ

1. पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है

भक्त मानते हैं कि पितर चालीसा से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार पर कृपा बनाए रखते हैं।

2. पितृ दोष शांति में सहायक

कई लोग पितृ दोष से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका पाठ करते हैं।

3. पारिवारिक शांति बढ़ती है

नियमित पाठ घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति लाने में सहायक माना जाता है।

4. आध्यात्मिक संतुलन मिलता है

चालीसा का पाठ मन को शांत और श्रद्धा से भर देता है।

5. पितृ पक्ष में विशेष महत्व

पितृ पक्ष और अमावस्या के दौरान इसका पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।

पितर चालीसा कब पढ़नी चाहिए?

सबसे शुभ समय:

  • पितृ पक्ष
  • अमावस्या
  • श्राद्ध कर्म के समय
  • सुबह स्नान के बाद
  • तर्पण और पिंड दान के दौरान

पितर चालीसा PDF Download

कई भक्त पितर चालीसा PDF डाउनलोड करना पसंद करते हैं ताकि:

दैनिक पाठ कर सकें
श्राद्ध में उपयोग कर सकें
ऑफलाइन पढ़ सकें
परिवार के साथ पूजा कर सकें
धार्मिक अध्ययन कर सकें

Frequently Asked Questions (FAQ)

1. पितर चालीसा क्या है?

पितर चालीसा पितृ देवताओं और पूर्वजों को समर्पित भक्ति पाठ है।

2. पितर चालीसा पढ़ने के क्या लाभ हैं?

भक्तों के अनुसार यह पितरों की कृपा, पारिवारिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।

3. पितर चालीसा कब पढ़नी चाहिए?

पितृ पक्ष, अमावस्या और श्राद्ध कर्म के समय इसका पाठ शुभ माना जाता है।

4. क्या पितर चालीसा पितृ दोष शांति में सहायक है?

कई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका पाठ पितृ दोष से जुड़े उपायों में किया जाता है।

5. पितृ पक्ष क्या होता है?

पितृ पक्ष हिंदू धर्म में पूर्वजों को समर्पित एक विशेष अवधि होती है।

6. क्या महिलाएँ पितर चालीसा पढ़ सकती हैं?

हाँ, महिलाएँ और पुरुष दोनों श्रद्धा से इसका पाठ कर सकते हैं।

7. Pitra Chalisa PDF कहाँ मिलेगी?

धार्मिक वेबसाइटों पर PDF उपलब्ध होती है।

8. क्या पितर चालीसा श्राद्ध में पढ़ी जाती है?

हाँ, इसे श्राद्ध और तर्पण के समय पढ़ा जाता है।

9. पितर चालीसा पढ़ने में कितना समय लगता है?

सामान्यतः 5 से 15 मिनट का समय लगता है।

10. क्या परिवार के साथ पितर चालीसा पढ़ सकते हैं?

हाँ, कई परिवार सामूहिक रूप से इसका पाठ करते हैं।

11. क्या पितर चालीसा सकारात्मक ऊर्जा लाती है?

भक्तों के अनुसार इसका पाठ घर में शांति और सकारात्मकता बढ़ाता है।

12. क्या अमावस्या पर पितर चालीसा पढ़ना शुभ है?

हाँ, अमावस्या पितरों की पूजा और स्मरण के लिए शुभ मानी जाती है।
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