एकादशी क्या है?
अमावस्या और पूर्णिमा के बाद आने वाली ग्यारहवीं तिथि को एकादशी कहा जाता है। कृष्ण पक्ष की एकादशी घटते चंद्रमा के समय और शुक्ल पक्ष की एकादशी बढ़ते चंद्रमा के समय आती है।
वैष्णव परंपरा में यह दिन भगवान विष्णु, नारायण और श्रीकृष्ण के नाम-स्मरण, आत्मसंयम तथा सात्त्विक जीवन के लिए समर्पित है। व्रत का उद्देश्य केवल भोजन छोड़ना नहीं, बल्कि क्रोध, असत्य, निंदा और अनुचित व्यवहार से भी बचना है।
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| आराध्य देव | भगवान विष्णु और उनके अवतार |
| तिथि | प्रत्येक पक्ष की ग्यारहवीं तिथि |
| महीने में संख्या | सामान्यतः दो |
| मुख्य साधना | व्रत, मंत्र जाप, कथा, दान और विष्णु पूजा |
| व्रत का पारण | अगले दिन द्वादशी तिथि में |
| प्रमुख मंत्र | ॐ नमो नारायणाय |
2026 की आगामी एकादशी तिथियां
नीचे दी गई तिथियां दिल्ली के स्मार्त पंचांग के अनुसार हैं। वैष्णव या ISKCON परंपरा में कुछ व्रत एक दिन बाद हो सकते हैं।
| तारीख | दिन | एकादशी का नाम | पक्ष और मास | एकादशी तिथि |
|---|---|---|---|---|
| 10 जुलाई 2026 | शुक्रवार | योगिनी एकादशी | आषाढ़ कृष्ण पक्ष | 10 जुलाई सुबह 8:16 से 11 जुलाई सुबह 5:22 तक |
| 25 जुलाई 2026 | शनिवार | देवशयनी एकादशी | आषाढ़ शुक्ल पक्ष | 24 जुलाई सुबह 9:12 से 25 जुलाई सुबह 11:34 तक |
| 9 अगस्त 2026 | रविवार | कामिका एकादशी | श्रावण कृष्ण पक्ष | 8 अगस्त दोपहर 1:59 से 9 अगस्त सुबह 11:04 तक |
| 23 अगस्त 2026 | रविवार | श्रावण पुत्रदा एकादशी | श्रावण शुक्ल पक्ष | 23 अगस्त सुबह 2:00 से 24 अगस्त सुबह 4:18 तक |
| 7 सितंबर 2026 | सोमवार | अजा एकादशी | भाद्रपद कृष्ण पक्ष | 6 सितंबर शाम 7:29 से 7 सितंबर शाम 5:03 तक |
| 22 सितंबर 2026 | मंगलवार | पार्श्व या परिवर्तिनी एकादशी | भाद्रपद शुक्ल पक्ष | 21 सितंबर रात 8:00 से 22 सितंबर रात 9:43 तक |
| 6 अक्टूबर 2026 | मंगलवार | इंदिरा एकादशी | आश्विन कृष्ण पक्ष | 6 अक्टूबर सुबह 2:07 से 7 अक्टूबर रात 12:34 तक |
| 22 अक्टूबर 2026 | गुरुवार | पापांकुशा एकादशी | आश्विन शुक्ल पक्ष | 21 अक्टूबर दोपहर 2:11 से 22 अक्टूबर दोपहर 2:47 तक |
| 5 नवंबर 2026 | गुरुवार | रमा एकादशी | कार्तिक कृष्ण पक्ष | 4 नवंबर सुबह 11:03 से 5 नवंबर सुबह 10:35 तक |
| 20 नवंबर 2026 | शुक्रवार | देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी | कार्तिक शुक्ल पक्ष | 20 नवंबर सुबह 7:15 से 21 नवंबर सुबह 6:31 तक |
| 4 दिसंबर 2026 | शुक्रवार | उत्पन्ना एकादशी | मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष | 3 दिसंबर रात 11:03 से 4 दिसंबर रात 11:44 तक |
| 20 दिसंबर 2026 | रविवार | मोक्षदा और वैकुंठ एकादशी | मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष | 19 दिसंबर रात 10:09 से 20 दिसंबर रात 8:14 तक |
ध्यान दें: योगिनी एकादशी का वैष्णव व्रत 11 जुलाई, श्रावण पुत्रदा का वैष्णव व्रत 24 अगस्त और देवउठनी का वैष्णव व्रत 21 नवंबर 2026 को हो सकता है।
2026 की सभी एकादशी के नाम और संक्षिप्त महत्व
नीचे प्रत्येक एकादशी का छोटा परिचय दिया गया है। भविष्य में संबंधित व्रत कथा प्रकाशित होने पर इन नामों को उनके अलग कथा-पेज से जोड़ा जा सकता है।
1. षटतिला एकादशी
माघ कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी में तिल का स्नान, दान, हवन और सेवन विशेष रूप से जुड़ा है। इसकी कथा दान के साथ करुणा और विनम्रता का संदेश देती है।
2. जया एकादशी
माघ शुक्ल पक्ष की जया एकादशी की कथा अनुचित कर्मों से मुक्ति, पश्चात्ताप और भगवान के स्मरण से जुड़ी है।
3. विजया एकादशी
फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी को कठिन कार्य में सफलता और बाधाओं को पार करने की प्रार्थना से जोड़ा जाता है। इसकी कथा भगवान श्रीराम की समुद्र यात्रा से संबंधित मानी जाती है।
4. आमलकी एकादशी
फाल्गुन शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष और भगवान विष्णु की पूजा की परंपरा है। यह प्रकृति, आरोग्य और भक्ति के प्रति कृतज्ञता सिखाती है।
5. पापमोचनी एकादशी
चैत्र कृष्ण पक्ष की पापमोचनी एकादशी की कथा तप, आकर्षण, भूल स्वीकार करने और प्रायश्चित से जुड़ी है।
6. कामदा एकादशी
चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी में ललित और ललिता की कथा प्रसिद्ध है। यह प्रेम, निष्ठा और गलत कर्म के प्रभाव से मुक्ति का संदेश देती है।
7. वरूथिनी एकादशी
वैशाख कृष्ण पक्ष की वरूथिनी एकादशी को जीवन में सुरक्षा, संयम और धर्मपूर्ण आचरण की प्रेरणा देने वाली तिथि माना जाता है।
8. मोहिनी एकादशी
वैशाख शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी मन के मोह, गलत संगति और विनाशकारी आदतों से बाहर निकलने की प्रेरणा देती है।
9. अपरा एकादशी
ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अपरा एकादशी की कथा जिम्मेदारी, सत्य और पूर्व में हुई गलतियों के लिए प्रायश्चित के महत्व पर केंद्रित है।
10. पद्मिनी एकादशी
पद्मिनी एकादशी अधिक मास या पुरुषोत्तम मास के शुक्ल पक्ष में आती है। यह विशेष विष्णु पूजा, कथा, दान और आत्मसंयम से जुड़ी दुर्लभ एकादशी है।
11. परमा एकादशी
परमा एकादशी अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आती है। इसकी कथा कठिन परिस्थितियों में धैर्य, भक्ति और ईमानदार जीवन बनाए रखने का संदेश देती है।
12. निर्जला एकादशी
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी को भीमसेनी या पांडव एकादशी भी कहा जाता है। इसका पारंपरिक व्रत जल और भोजन के बिना रखा जाता है, लेकिन स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या जल ग्रहण करना उचित हो सकता है।
13. योगिनी एकादशी
आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी में राजा कुबेर के सेवक हेममाली की कथा कही जाती है। यह कर्तव्य में लापरवाही, उसके परिणाम और प्रायश्चित का संदेश देती है।
14. देवशयनी एकादशी
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु की योगनिद्रा और चातुर्मास का आरंभ माना जाता है। इसे हरिशयनी और शयनी एकादशी भी कहते हैं।
15. कामिका एकादशी
श्रावण कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी भगवान विष्णु की तुलसीदल, दीप और नाम-जप से पूजा के लिए जानी जाती है।
16. श्रावण पुत्रदा एकादशी
श्रावण शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी में परिवार और संतान के स्वास्थ्य, संस्कार तथा कल्याण की प्रार्थना की जाती है।
17. अजा एकादशी
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी की कथा सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी है। यह सत्य, धैर्य और कठिन समय में धर्म न छोड़ने की प्रेरणा देती है।
18. पार्श्व या परिवर्तिनी एकादशी
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की इस एकादशी पर भगवान विष्णु के योगनिद्रा में करवट बदलने की मान्यता है। इसे पद्मा और वामन एकादशी भी कहा जाता है।
19. इंदिरा एकादशी
आश्विन कृष्ण पक्ष की इंदिरा एकादशी पितरों के कल्याण की प्रार्थना और श्राद्ध पक्ष की धार्मिक साधना से जुड़ी है।
20. पापांकुशा एकादशी
आश्विन शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी भगवान पद्मनाभ की पूजा, आत्मनियंत्रण और अनुचित कर्मों से बचने का संदेश देती है।
21. रमा एकादशी
कार्तिक कृष्ण पक्ष की रमा एकादशी माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की उपासना से जुड़ी है। इसकी कथा भक्ति और व्रत के प्रति निष्ठा का महत्व समझाती है।
22. देवउठनी एकादशी
कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने की मान्यता है। इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं और इसके साथ चातुर्मास पूर्ण होता है।
23. उत्पन्ना एकादशी
मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की उत्पन्ना एकादशी में देवी एकादशी के प्राकट्य और मुर नामक असुर के वध की कथा कही जाती है। कई भक्त इस दिन से एकादशी व्रत आरंभ करते हैं।
24. मोक्षदा और वैकुंठ एकादशी
मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी को मुक्ति, पूर्वजों के कल्याण और भगवद्गीता के उपदेश से जोड़ा जाता है। दक्षिण भारतीय परंपराओं में इसी तिथि को वैकुंठ एकादशी के रूप में विशेष रूप से मनाया जाता है।
एकादशी व्रत और पूजा की सरल विधि
- दशमी तिथि से सात्त्विक भोजन करें और संयम बनाए रखें।
- एकादशी की सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- भगवान विष्णु, लक्ष्मीनारायण, श्रीराम या श्रीकृष्ण का चित्र स्थापित करें।
- घी का दीपक और धूप सुरक्षित स्थान पर प्रज्वलित करें।
- भगवान को चंदन, पीले फूल, फल और पहले से रखे हुए तुलसीदल अर्पित करें।
- एकादशी व्रत का संकल्प लें और अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।
- “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप करें।
- संबंधित एकादशी की व्रत कथा, विष्णु सहस्रनाम या भगवद्गीता पढ़ें।
- शाम को भगवान विष्णु की आरती करें।
- अगले दिन उचित द्वादशी पारण समय में व्रत खोलें।
हे भगवान नारायण, मुझे सत्य, करुणा, संयम और अपने कर्तव्य के मार्ग पर चलने की बुद्धि प्रदान करें।
एकादशी व्रत में क्या खाएं?
फलाहार करने वाले भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार निम्न पदार्थ ग्रहण कर सकते हैं:
- मौसमी फल और सूखे मेवे
- दूध, दही और छाछ
- मखाना और नारियल
- साबूदाना
- कुट्टू, सिंघाड़ा या राजगिरा आटा
- आलू, शकरकंद और अरबी
- सेंधा नमक
एकादशी व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?
- गेहूं, चावल और सामान्य अनाज
- दालें और फलियां
- सामान्य नमक
- प्याज और लहसुन
- मांस, मछली और अंडा
- शराब और तामसिक भोजन
हर परिवार और वैष्णव परंपरा में भोजन के नियम अलग हो सकते हैं। बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं, मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्या वाले लोग कठोर व्रत से पहले चिकित्सक की सलाह लें।
एकादशी व्रत का पारण कैसे करें?
एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि में व्रत खोलने को पारण कहा जाता है। पारण सामान्यतः सूर्योदय के बाद निर्धारित समय में किया जाता है।
- सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें।
- जल, तुलसी या प्रसाद ग्रहण करके पारण आरंभ करें।
- इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार सात्त्विक भोजन करें।
- जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या उपयोगी वस्तु का दान कर सकते हैं।
पारण का सही समय शहर, सूर्योदय और द्वादशी तिथि के अनुसार बदलता है। प्रत्येक एकादशी की कथा वाले अलग पेज पर स्थानीय पारण समय देना अधिक उपयोगी रहेगा।
एकादशी पर पढ़े जाने वाले विष्णु मंत्र
नारायण मंत्र
ॐ नमो नारायणाय॥
वासुदेव मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
विष्णु गायत्री मंत्र
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
मंत्र को स्पष्ट और शांत गति से बोलें। संख्या से अधिक नियमितता, श्रद्धा और मंत्र का भाव महत्वपूर्ण है।
एकादशी व्रत का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
- भगवान विष्णु के प्रति भक्ति और नाम-स्मरण बढ़ता है।
- भोजन, वाणी और व्यवहार में संयम का अभ्यास होता है।
- मन को प्रार्थना और आध्यात्मिक अध्ययन में लगाने का अवसर मिलता है।
- दान, सेवा और जरूरतमंदों की सहायता की प्रेरणा मिलती है।
- नियमित दिनचर्या और आत्मअनुशासन विकसित हो सकता है।
- प्रत्येक एकादशी की कथा जीवन की अलग नैतिक शिक्षा देती है।
व्रत के लाभ धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित हैं। व्रत को बीमारी, आर्थिक संकट या अन्य समस्या के निश्चित समाधान की गारंटी नहीं मानना चाहिए।
एकादशी से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. 2026 में अगली एकादशी कब है?
29 जून 2026 के बाद अगली स्मार्त एकादशी योगिनी एकादशी है, जिसका व्रत 10 जुलाई 2026 को रखा जाएगा। वैष्णव योगिनी एकादशी 11 जुलाई को हो सकती है।
2. 2026 में अब कितनी एकादशी बाकी हैं?
29 जून 2026 के बाद दिसंबर तक 12 स्मार्त एकादशी व्रत तिथियां शेष हैं।
3. एक महीने में कितनी एकादशी आती हैं?
सामान्यतः प्रत्येक चंद्र मास में दो एकादशी आती हैं—एक कृष्ण पक्ष और दूसरी शुक्ल पक्ष में।
4. स्मार्त और वैष्णव एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है?
व्रत की तारीख तय करते समय सूर्योदय, एकादशी तिथि और द्वादशी की स्थिति देखी जाती है। वैष्णव परंपरा के नियम अधिक विशिष्ट होने के कारण कुछ अवसरों पर व्रत अगले दिन रखा जाता है।
5. एकादशी व्रत कब से शुरू होता है?
कई भक्त दशमी से सात्त्विक आहार और संयम शुरू करते हैं। मुख्य उपवास एकादशी के सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी के पारण तक रखा जाता है।
6. क्या एकादशी में चावल खा सकते हैं?
पारंपरिक एकादशी व्रत में चावल सहित सभी सामान्य अनाज नहीं खाए जाते। फलाहार करने वाले भक्त कुट्टू, सिंघाड़ा, राजगिरा और साबूदाना ले सकते हैं।
7. क्या एकादशी में चाय या कॉफी पी सकते हैं?
यह परिवार और व्रत के नियम पर निर्भर करता है। कठोर व्रत में इन्हें नहीं लिया जाता। सामान्य फलाहार में कुछ लोग सीमित मात्रा में दूध वाली चाय लेते हैं, लेकिन अत्यधिक कैफीन से बचना अच्छा है।
8. क्या एकादशी के दिन तुलसी तोड़नी चाहिए?
परंपरा में एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ने की सलाह दी जाती है। पूजा के लिए तुलसीदल एक दिन पहले स्वच्छ रूप से रख सकते हैं।
9. क्या बिना उपवास के एकादशी पूजा कर सकते हैं?
हां। स्वास्थ्य या अन्य कारण से व्रत न रख पाने वाला व्यक्ति भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप, कथा, दान और सात्त्विक भोजन कर सकता है।
10. क्या महिलाएं एकादशी व्रत रख सकती हैं?
हां। महिलाएं, पुरुष और परिवार के अन्य सदस्य अपनी क्षमता तथा स्वास्थ्य के अनुसार एकादशी व्रत और पूजा कर सकते हैं।
11. क्या बच्चे और बुजुर्ग एकादशी व्रत रखें?
बच्चों और बुजुर्गों के लिए कठोर या निर्जल व्रत आवश्यक नहीं है। वे फलाहार, सात्त्विक भोजन, पूजा और नाम-स्मरण कर सकते हैं।
12. एकादशी का व्रत किस समय खोलना चाहिए?
व्रत अगले दिन द्वादशी में निर्धारित पारण समय पर खोला जाता है। सही समय अपने शहर के स्थानीय पंचांग से देखना चाहिए।
13. एकादशी पर कौन-सा पाठ करना चाहिए?
एकादशी पर विष्णु सहस्रनाम, भगवद्गीता, विष्णु चालीसा, नारायण स्तोत्र, संबंधित व्रत कथा और “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र पढ़ा जा सकता है।
14. देवशयनी और देवउठनी एकादशी में क्या अंतर है?
देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु की योगनिद्रा और चातुर्मास का आरंभ माना जाता है। देवउठनी एकादशी पर भगवान के जागने और चातुर्मास पूर्ण होने की मान्यता है।
15. मोक्षदा और वैकुंठ एकादशी क्या एक ही दिन हैं?
2026 में दोनों 20 दिसंबर को हैं। मोक्षदा एकादशी उत्तर भारतीय परंपरा में और वैकुंठ एकादशी दक्षिण भारतीय वैष्णव परंपराओं में विशेष रूप से मनाई जाती है।
निष्कर्ष
एकादशी भगवान विष्णु की उपासना, आत्मसंयम और सात्त्विक जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण तिथि है। 2026 की अगली एकादशी 10 जुलाई को योगिनी एकादशी है और वर्ष की अंतिम एकादशी 20 दिसंबर को मोक्षदा तथा वैकुंठ एकादशी होगी।
ॐ नमो नारायणाय। भगवान श्रीहरि विष्णु की जय।