विष्णु सूक्तम् हिंदी अर्थ सहित | संपूर्ण पाठ और पाठ विधि
विष्णु सूक्तम् भगवान विष्णु की सर्वव्यापकता, उनके विराट सामर्थ्य और तीन दिव्य पगों का वर्णन करने वाला वैदिक पाठ है। इसमें भगवान विष्णु को पृथ्वी, अंतरिक्ष और द्युलोक को धारण करने वाले व्यापक परमात्मा के रूप में स्मरण किया गया है।
इस सूक्त में आने वाला विष्णु का त्रिविक्रम स्वरूप बाद की वैष्णव परंपरा में भगवान वामन द्वारा तीन पगों में लोकों को नापने की कथा से भी जोड़ा जाता है। वैदिक संदर्भ में तीन पग भगवान विष्णु की समस्त लोकों में व्यापक सत्ता को प्रकट करते हैं।
ॐ नमो नारायणाय। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
विष्णु सूक्तम् क्या है?
विष्णु सूक्तम् भगवान विष्णु को समर्पित वैदिक मंत्रों का समूह है। “विष्णु” शब्द का संबंध व्यापकता से जोड़ा जाता है। सूक्त के मंत्र भगवान को तीनों लोकों में व्याप्त, पृथ्वी को धारण करने वाले और समस्त प्राणियों को आश्रय देने वाले परम स्वरूप के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| शुद्ध नाम | विष्णु सूक्तम् |
| आराध्य देव | भगवान विष्णु |
| इस पेज का पाठ | शुक्ल यजुर्वेद अध्याय 5 के मंत्र 15 से 21 |
| प्रमुख वैदिक विषय | विष्णु की सर्वव्यापकता और तीन दिव्य पग |
| मुख्य नाम | उरुक्रम, उरुगाय और त्रिविक्रम |
| पाठ का अवसर | विष्णु पूजा, एकादशी, गुरुवार और वैदिक अनुष्ठान |
विष्णु सूक्त या विष्णु सुक्त: सही नाम क्या है?
इस वैदिक पाठ का शुद्ध नाम “विष्णु सूक्तम्” है। “सूक्त” का अर्थ वेद में प्राप्त सुंदर, सत्यपूर्ण और देवता की स्तुति करने वाले मंत्रों का समूह है।
“विष्णु सुक्त”, “विष्णु सूक्तम” और “Vishnu Suktam” इंटरनेट पर प्रचलित search variations हैं। धार्मिक लेख और संस्कृत पाठ में “विष्णु सूक्तम्” लिखना अधिक उचित है।
विष्णु सूक्तम् किस वेद में मिलता है?
वेदों में भगवान विष्णु को समर्पित कई मंत्र और सूक्त प्राप्त होते हैं। इस पेज पर दिया गया सात मंत्रों का प्रचलित पूजा-पाठ शुक्ल यजुर्वेद के अध्याय 5, मंत्र 15 से 21 के क्रम पर आधारित है।
ऋग्वेद के प्रथम मंडल का 154वां सूक्त भी प्रसिद्ध विष्णु सूक्त है। उसमें छह मंत्र हैं और विष्णु के तीन विशाल पगों तथा परम पद का वर्णन मिलता है। कुछ विस्तृत विष्णु सूक्तम् पाठों में ऋग्वेद के अलग-अलग मंडलों के विष्णु मंत्र भी एक साथ पढ़े जाते हैं।
अलग पुस्तकों में विष्णु सूक्तम् के मंत्रों की संख्या अलग दिखाई दे सकती है, क्योंकि उनकी वैदिक शाखा और संकलन-परंपरा अलग हो सकती है।
विष्णु सूक्तम् संपूर्ण पाठ हिंदी अर्थ सहित
नीचे मंत्र सामान्य पाठकों की सुविधा के लिए वैदिक स्वर-चिह्नों के बिना दिए गए हैं। पारंपरिक स्वरयुक्त पाठ किसी योग्य वेदपाठी से सीखना चाहिए।
मंत्र 1
इदं विष्णुर्वि चक्रमे त्रेधा नि दधे पदम्। समूढमस्य पांसुरे स्वाहा॥ 1॥
सरल अर्थ: सर्वव्यापक भगवान विष्णु ने अपनी दिव्य शक्ति से संपूर्ण जगत को व्याप्त किया और तीन लोकों में अपने तीन पद स्थापित किए। यह समस्त संसार उन्हीं की व्यापक सत्ता में स्थित है।
मंत्र 2
इरावती धेनुमती हि भूतं सूयवसिनी मनवे दशस्या। व्यस्तभ्ना रोदसी विष्णवेते दाधर्थ पृथिवीमभितो मयूखैः स्वाहा॥ 2॥
सरल अर्थ: पृथ्वी जल, अन्न, गौ-समृद्धि और जीवन के उपयोगी साधनों से परिपूर्ण हो। भगवान विष्णु ने अपनी दिव्य किरणों और शक्ति से पृथ्वी तथा आकाश को सभी ओर से धारण किया है।
मंत्र 3
देवश्रुतौ देवेष्वा घोषतं प्राची प्रेतमध्वरं कल्पयन्ती ऊर्ध्वं यज्ञं नयतं मा जिह्वरतम्। स्वं गोष्ठमा वदतं देवी दुर्ये आयुर्मा निर्वादिष्टं प्रजां मा निर्वादिष्टमत्र रमेथां वर्ष्मन् पृथिव्याः॥ 3॥
सरल अर्थ: दिव्य शक्तियां यज्ञ और धर्मपूर्ण कर्म को आगे बढ़ाएं। जीवन और संतान की रक्षा हो, कुटिलता से बचाव हो तथा पृथ्वी पर सुख, व्यवस्था और समृद्धि बनी रहे।
मंत्र 4
विष्णोर्नु कं वीर्याणि प्र वोचं यः पार्थिवानि विममे रजांसि। यो अस्कभायदुत्तरं सधस्थं विचक्रमाणस्त्रेधोरुगायो विष्णवे त्वा॥ 4॥
सरल अर्थ: मैं भगवान विष्णु के महान कार्यों का वर्णन करता हूं। उन्होंने पृथ्वी के प्रदेशों को मापा, ऊंचे दिव्य लोक को धारण किया और अपने तीन विशाल पगों से समस्त जगत को व्याप्त किया।
मंत्र 5
दिवो वा विष्ण उत वा पृथिव्या महो वा विष्ण उरोरन्तरिक्षात्। उभा हि हस्ता वसुना पृणस्वा प्रयच्छ दक्षिणादोत सव्याद्विष्णवे त्वा॥ 5॥
सरल अर्थ: हे भगवान विष्णु! स्वर्ग, पृथ्वी और विशाल अंतरिक्ष से प्राप्त जीवनोपयोगी साधनों द्वारा हमें पूर्णता प्रदान करें। अपने दोनों हाथों से सभी दिशाओं से कल्याण और आवश्यक संपदा प्रदान करें।
मंत्र 6
प्र तद्विष्णुः स्तवते वीर्येण मृगो न भीमः कुचरो गिरिष्ठाः। यस्योरुषु त्रिषु विक्रमणेष्वधिक्षियन्ति भुवनानि विश्वा॥ 6॥
सरल अर्थ: भगवान विष्णु अपने महान सामर्थ्य के कारण स्तुति के योग्य हैं। वे पर्वतों में विचरण करने वाले शक्तिशाली सिंह के समान हैं। उनके तीन विस्तृत पगों में सभी लोक और प्राणी स्थित हैं।
मंत्र 7
विष्णो रराटमसि विष्णोः श्नप्त्रे स्थो विष्णोः स्यूरसि विष्णोर्ध्रुवोऽसि। वैष्णवमसि विष्णवे त्वा॥ 7॥
सरल अर्थ: तुम विष्णु के अग्रभाग, बंधन, आधार और स्थिरता के प्रतीक हो। तुम वैष्णव अर्थात भगवान विष्णु से संबंधित हो और तुम्हें भगवान विष्णु को समर्पित किया जाता है।
समापन शांति पाठ
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
तीन बार शांति बोलने का भाव आध्यात्मिक, प्राकृतिक और बाहरी बाधाओं से शांति की प्रार्थना करना है।
विष्णु सूक्तम् का संपूर्ण भावार्थ
विष्णु सूक्तम् भगवान विष्णु को केवल किसी एक स्थान में विराजमान देवता के रूप में नहीं, बल्कि पृथ्वी, अंतरिक्ष और उच्च लोकों में व्याप्त परम सत्ता के रूप में प्रस्तुत करता है।
भगवान विष्णु के तीन पदों में समस्त जगत स्थित है। वे पृथ्वी को धारण करते हैं, जीवन के लिए आवश्यक अन्न, जल और साधनों की व्यवस्था करते हैं तथा धर्मपूर्ण कर्म को ऊपर उठाने की प्रेरणा देते हैं।
सूक्त में जीवन, संतान, व्यवस्था, बुद्धि, समृद्धि और सभी दिशाओं से कल्याण की प्रार्थना भी की गई है। इसका मूल संदेश है कि मनुष्य प्रकृति, समाज और ईश्वर के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए धर्मपूर्ण जीवन व्यतीत करे।
विष्णु के तीन पगों का क्या अर्थ है?
विष्णु सूक्तम् में भगवान के तीन विस्तृत पगों का बार-बार उल्लेख मिलता है। इसकी कई पारंपरिक व्याख्याएं हैं:
- पृथ्वी, अंतरिक्ष और द्युलोक में भगवान की व्यापकता
- संपूर्ण दिखाई देने वाले और अदृश्य जगत पर उनकी सत्ता
- सूर्य की प्रातः, मध्याह्न और सायंकालीन गति
- भगवान वामन के तीन पगों में तीनों लोकों को नापने की लीला
- साधक की सांसारिक अवस्था से परम पद की आध्यात्मिक यात्रा
वैदिक मंत्र का मुख्य भाव यह है कि ऐसा कोई लोक, दिशा या स्थान नहीं है जो भगवान विष्णु की व्यापक सत्ता से बाहर हो।
विष्णु सूक्तम् और नारायण सूक्तम् में अंतर
| विष्णु सूक्तम् | नारायण सूक्तम् |
|---|---|
| भगवान विष्णु के विराट कर्म और तीन पगों का वर्णन | नारायण की सर्वव्यापकता और हृदय में स्थित परमात्मा का वर्णन |
| पृथ्वी, अंतरिक्ष और उच्च लोकों पर विशेष ध्यान | हृदय-कमल और आंतरिक दिव्य ज्योति पर विशेष ध्यान |
| विभिन्न वैदिक शाखाओं में अलग पाठ-क्रम मिलते हैं | प्रचलित पाठ तैत्तिरीय आरण्यक से संबंधित है |
| त्रिविक्रम और परम पद का भाव प्रमुख है | परम ब्रह्म, ध्यान और अंतर्यामी नारायण का भाव प्रमुख है |
दोनों सूक्त भगवान विष्णु या नारायण की महिमा बताते हैं, लेकिन उनकी मंत्र-रचना, वैदिक स्रोत और ध्यान का विषय अलग है।
विष्णु सूक्तम् का पाठ कैसे करें?
- स्नान करके या हाथ-मुंह धोकर स्वच्छ स्थान पर बैठें।
- भगवान विष्णु, लक्ष्मीनारायण या श्रीकृष्ण का ध्यान करें।
- सुरक्षित स्थान पर घी का दीपक जलाएं।
- उपलब्ध होने पर पीले फूल, फल और पहले से रखा हुआ तुलसीदल अर्पित करें।
- “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का 11 बार जाप करें।
- विष्णु सूक्तम् को धीरे और स्पष्ट उच्चारण के साथ पढ़ें।
- प्रत्येक मंत्र के बाद उसका हिंदी अर्थ पढ़ सकते हैं।
- अंत में शांति पाठ और भगवान विष्णु की आरती करें।
- कुछ समय मौन बैठकर भगवान की सर्वव्यापकता का ध्यान करें।
हे भगवान विष्णु, हमें धर्मपूर्ण कर्म, निर्मल बुद्धि, प्रकृति के प्रति सम्मान और सभी प्राणियों के कल्याण की भावना प्रदान करें।
सही उच्चारण और वैदिक स्वर
विष्णु सूक्तम् वैदिक मंत्रों का पाठ है। मूल मंत्रों में उदात्त, अनुदात्त और स्वरित जैसे वैदिक स्वर होते हैं। सामान्य भक्तिपूर्ण पाठ में स्वर-चिह्नों के बिना मंत्र पढ़े जाते हैं, लेकिन औपचारिक वैदिक पाठ योग्य वेदपाठी से सीखना चाहिए।
- मंत्रों को बहुत तेज गति से न पढ़ें।
- “विष्णोर्नु कं”, “विक्रमणेषु”, “उरुगाय” और “विष्णोर्ध्रुवोऽसि” जैसे शब्द ध्यान से बोलें।
- विश्वसनीय वैदिक पाठ सुनते हुए लिखित मंत्र से अभ्यास करें।
- मंत्रों को मनमाने ढंग से बदलकर या जोड़कर न पढ़ें।
- सामान्य गलती होने पर भयभीत न होकर धीरे-धीरे उच्चारण सुधारें।
विष्णु सूक्तम् का पाठ कब करना चाहिए?
- प्रतिदिन प्रातःकालीन पूजा में
- गुरुवार के दिन
- एकादशी पर
- वैकुंठ एकादशी और देवउठनी एकादशी पर
- भगवान विष्णु या सत्यनारायण पूजा में
- विष्णु सहस्रनाम से पहले या बाद में
- गृह पूजा, यज्ञ या हवन के समय
- वामन जयंती और विष्णु से जुड़े उत्सवों पर
दैनिक भक्तिपूर्ण पाठ के लिए कोई एक समय अनिवार्य नहीं है। ऐसा समय चुनें जब मन शांत हो और मंत्रों को समझते हुए पढ़ा जा सके।
विष्णु सूक्तम् पाठ का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
- भगवान विष्णु की सर्वव्यापकता का स्मरण कराता है।
- पृथ्वी, प्रकृति और जीवन के साधनों के प्रति कृतज्ञता सिखाता है।
- भगवान के त्रिविक्रम और परम पद पर चिंतन की प्रेरणा देता है।
- धर्मपूर्ण कर्म और यज्ञभाव को आगे बढ़ाने का संदेश देता है।
- जीवन, परिवार और समाज के कल्याण की प्रार्थना सिखाता है।
- नियमित वैदिक पाठ और ध्यान की दिनचर्या बनाने में सहायक हो सकता है।
- सभी लोकों और प्राणियों में एक ही ईश्वरीय सत्ता देखने की दृष्टि देता है।
इन लाभों का आधार धार्मिक श्रद्धा और व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभव है। विष्णु सूक्तम् को बीमारी, आर्थिक समस्या या किसी अन्य कठिनाई के निश्चित समाधान की गारंटी नहीं मानना चाहिए।
विष्णु सूक्तम् से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. विष्णु सूक्तम् क्या है?
विष्णु सूक्तम् भगवान विष्णु की सर्वव्यापकता, विराट सामर्थ्य और तीन दिव्य पगों का वर्णन करने वाले वैदिक मंत्रों का समूह है।
2. विष्णु सूक्तम् किस वेद में है?
वेदों में विष्णु से संबंधित कई सूक्त हैं। इस पेज का सात-मंत्र वाला पाठ शुक्ल यजुर्वेद के अध्याय 5, मंत्र 15 से 21 पर आधारित है। ऋग्वेद 1.154 भी प्रसिद्ध विष्णु सूक्त है।
3. विष्णु सूक्तम् में कितने मंत्र हैं?
यह पाठ-परंपरा पर निर्भर करता है। इस पेज के यजुर्वेदीय क्रम में सात मंत्र हैं। ऋग्वेद 1.154 के विष्णु सूक्त में छह मंत्र हैं, जबकि विस्तृत संकलनों में अधिक मंत्र हो सकते हैं।
4. विष्णु सूक्तम् के ऋषि कौन हैं?
अलग वैदिक पाठों के ऋषि अलग हैं। ऋग्वेद 1.154 के ऋषि दीर्घतमा औचथ्य माने जाते हैं। शुक्ल यजुर्वेद के सात-मंत्र वाले क्रम को यजुर्वेदीय अनुष्ठान परंपरा के अनुसार पढ़ा जाता है।
5. विष्णु के तीन पगों का अर्थ क्या है?
तीन पगों को पृथ्वी, अंतरिक्ष और द्युलोक में भगवान की व्यापकता से जोड़ा जाता है। वैष्णव परंपरा में इसे भगवान वामन की त्रिविक्रम लीला से भी संबंधित माना जाता है।
6. विष्णु सूक्तम् और पुरुष सूक्तम् एक ही हैं?
नहीं। पुरुष सूक्तम् ब्रह्मांडीय पुरुष और सृष्टि का वर्णन करता है, जबकि विष्णु सूक्तम् भगवान विष्णु के विराट कर्म, तीन पग और सर्वव्यापकता पर केंद्रित है।
7. विष्णु सूक्तम् और नारायण सूक्तम् में क्या अंतर है?
विष्णु सूक्तम् में भगवान के तीन विशाल पगों और लोकों को धारण करने की महिमा है। नारायण सूक्तम् में सर्वव्यापक नारायण और हृदय में स्थित परम ज्योति का ध्यान है।
8. क्या विष्णु सूक्तम् प्रतिदिन पढ़ सकते हैं?
हां। सामान्य भक्तिपूर्ण रूप में इसका दैनिक पाठ किया जा सकता है। वैदिक स्वर सहित औपचारिक पाठ किसी योग्य वेदपाठी से सीखना उचित है।
9. क्या एकादशी पर विष्णु सूक्तम् पढ़ सकते हैं?
हां। एकादशी भगवान विष्णु की उपासना से जुड़ी तिथि है। इस दिन विष्णु सूक्तम्, विष्णु सहस्रनाम, नारायण सूक्तम् और भगवद्गीता का पाठ किया जा सकता है।
10. क्या महिलाएं विष्णु सूक्तम् पढ़ सकती हैं?
महिलाएं सामान्य भक्तिपूर्ण रूप से विष्णु सूक्तम् पढ़ या सुन सकती हैं। औपचारिक स्वरयुक्त वैदिक पाठ के नियम विभिन्न परिवारों और वैदिक संस्थाओं में अलग हो सकते हैं।
11. क्या पाठ के लिए दीक्षा आवश्यक है?
सामान्य अर्थ सहित पाठ और श्रवण के लिए लोग इसे पढ़ते हैं। विशेष यज्ञ, वैदिक स्वर या अनुष्ठान में प्रयोग के लिए योग्य आचार्य का मार्गदर्शन लेना उचित है।
12. संस्कृत न आने पर विष्णु सूक्तम् कैसे पढ़ें?
एक-एक मंत्र को धीमी रिकॉर्डिंग के साथ बोलें और उसके बाद हिंदी अर्थ पढ़ें। कठिन लगे तो पहले मंत्रों का श्रवण और अर्थ का अध्ययन कर सकते हैं।
13. गलत उच्चारण हो जाए तो क्या करें?
सीखते समय सामान्य गलती होने पर डरने की आवश्यकता नहीं है। धीरे पढ़ें, विश्वसनीय पाठ सुनें और किसी जानकार व्यक्ति से उच्चारण सुधारें।
14. क्या विष्णु सूक्तम् मनोकामना पूरी करता है?
धार्मिक परंपरा में इसका पाठ भगवान विष्णु की कृपा और कल्याण की प्रार्थना के रूप में किया जाता है। इसे किसी विशेष इच्छा पूरी होने की निश्चित गारंटी नहीं मानना चाहिए।
15. क्या विष्णु सूक्तम् हवन में पढ़ सकते हैं?
इसके मंत्र वैदिक अनुष्ठान और यज्ञ परंपरा से जुड़े हैं। औपचारिक हवन में मंत्र, स्वर, आहुति और विधि योग्य आचार्य के मार्गदर्शन में करनी चाहिए।
16. विष्णु सूक्तम् के बाद क्या पढ़ना चाहिए?
पाठ के बाद “ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः”, “ॐ नमो नारायणाय”, विष्णु गायत्री मंत्र या भगवान विष्णु की आरती पढ़ी जा सकती है।
हिंदी में भगवान विष्णु के स्तोत्र, मंत्र, चालीसा, कथा और आरती
निष्कर्ष
विष्णु सूक्तम् भगवान विष्णु को पृथ्वी, अंतरिक्ष और उच्च लोकों में व्याप्त परम सत्ता के रूप में प्रस्तुत करता है। उनके तीन दिव्य पग इस सत्य का प्रतीक हैं कि संपूर्ण जगत उनके भीतर स्थित है।
इस सूक्त का पाठ करते समय केवल शब्दों की पुनरावृत्ति न करके भगवान की सर्वव्यापकता, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और धर्मपूर्ण कर्म के संदेश पर भी ध्यान करना चाहिए।
ॐ नमो नारायणाय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥