ॐ जय जगदीश हरे आरती | विष्णु आरती हिंदी में PDF

“ॐ जय जगदीश हरे” भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित सबसे लोकप्रिय आरतियों में से एक है। इसे घर, मंदिर, सत्यनारायण पूजा, एकादशी, गुरुवार और विभिन्न धार्मिक आयोजनों में श्रद्धापूर्वक गाया जाता है।इस आरती में भक्त भगवान विष्णु को जगत के स्वामी, पालनकर्ता, अंतर्यामी और दुःखों को दूर करने वाले परमात्मा के रूप में प्रणाम करता है। आरती का मुख्य भाव है—पूर्ण विश्वास, समर्पण, भक्ति और अपने तन, मन तथा धन को भगवान को अर्पित करना।

ॐ जय जगदीश हरे आरती

Aarti Om Jai Jagdish Hare in Hindi Lyrics

ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट,
क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे॥

जो ध्यावे फल पावे,
दुःख विनसे मन का।
सुख-सम्पत्ति घर आवे,
कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे॥

मात-पिता तुम मेरे,
शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा,
आस करूं मैं जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे॥

तुम पूरण परमात्मा,
तुम अंतर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर,
तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे॥

तुम करुणा के सागर,
तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी,
कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे॥

तुम हो एक अगोचर,
सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय,
तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे॥

दीनबंधु दुःखहर्ता,
तुम रक्षक मेरे।
करुणा हस्त बढ़ाओ,
द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे॥

विषय-विकार मिटाओ,
पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ,
संतन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे॥

तन-मन-धन सब कुछ है तेरा,
तेरा तुझको अर्पण।
क्या लागे मेरा॥
ॐ जय जगदीश हरे॥

ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट,
क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे॥

ॐ जय जगदीश हरे आरती का सरल अर्थ

इस आरती में भक्त भगवान विष्णु की जय बोलते हुए प्रार्थना करता है कि वे भक्तों के दुःख और संकट दूर करें। भगवान को माता, पिता, पालनकर्ता, परमात्मा और सभी जीवों के अंतर्यामी स्वामी के रूप में स्वीकार किया गया है।

भक्त अपनी कमियों को स्वीकार करते हुए भगवान से करुणा, सद्बुद्धि और सच्ची भक्ति की प्रार्थना करता है। अंतिम पंक्तियों में वह अपना तन, मन, धन और जीवन भगवान को समर्पित करते हुए कहता है कि संसार में जो कुछ भी उसके पास है, वह वास्तव में भगवान का ही दिया हुआ है।

ॐ जय जगदीश हरे आरती का महत्व

  • भगवान विष्णु के प्रति श्रद्धा और समर्पण की भावना मजबूत करती है।
  • पूजा के अंत में भगवान के प्रति gratitude व्यक्त करने का माध्यम है।
  • परिवार के साथ गाने पर घर में devotional वातावरण बनता है।
  • भक्त को अहंकार छोड़कर भगवान की शरण ग्रहण करने की प्रेरणा देती है।
  • तन, मन और धन को धर्मपूर्ण कार्यों में लगाने का संदेश देती है।
  • कठिन समय में मन को आशा और आध्यात्मिक सहारा प्रदान कर सकती है।

आरती से जुड़े लाभ धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित हैं। इसे बीमारी, आर्थिक कठिनाई या किसी अन्य गंभीर समस्या के व्यावहारिक समाधान का विकल्प नहीं मानना चाहिए।

भगवान विष्णु की आरती कैसे करें?

  1. भगवान विष्णु, लक्ष्मी नारायण या श्रीकृष्ण के चित्र अथवा प्रतिमा के सामने बैठें।
  2. दीपक जलाकर फूल, तुलसीदल, फल या सात्त्विक प्रसाद अर्पित करें।
  3. भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए “ॐ नमो नारायणाय” बोलें।
  4. दीपक की थाली को श्रद्धापूर्वक भगवान के सामने घुमाते हुए आरती गाएं।
  5. आरती के बाद भगवान को प्रणाम करें और प्रसाद बांटें।
  6. अंत में अपने साथ सभी जीवों के कल्याण की प्रार्थना करें।

सरल प्रार्थना: हे भगवान विष्णु, मेरे मन से अहंकार, भय और नकारात्मकता दूर करें। मुझे सद्बुद्धि, भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करें।

ॐ जय जगदीश हरे आरती कब करनी चाहिए?

भगवान विष्णु की आरती किसी भी दिन की जा सकती है। इसके लिए सबसे सामान्य समय हैं:

  • सुबह की पूजा के बाद
  • सायंकाल दीपक जलाने के समय
  • गुरुवार को
  • एकादशी के दिन
  • सत्यनारायण भगवान की पूजा के बाद
  • विष्णु, कृष्ण और राम से जुड़े पर्वों पर
  • घर में आयोजित भजन या सत्संग के समय

आरती का निश्चित समय अनिवार्य नहीं है। ऐसा समय चुनें जब परिवार के सदस्य शांत मन से पूजा में शामिल हो सकें।

आरती करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • आरती श्रद्धा और शांत भाव से गाएं।
  • शब्दों को जल्दी-जल्दी बोलने की जगह स्पष्ट उच्चारण करें।
  • दीपक को बच्चों और ज्वलनशील वस्तुओं से सुरक्षित दूरी पर रखें।
  • आरती को केवल मनोकामना पूर्ति का साधन न मानें।
  • भगवान से सद्बुद्धि, विनम्रता और सेवा-भाव की भी प्रार्थना करें।
  • पूजा के बाद प्रसाद को सम्मानपूर्वक सभी में बांटें।

ॐ जय जगदीश हरे आरती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. ॐ जय जगदीश हरे किस भगवान की आरती है?

यह आरती मुख्य रूप से भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। इसमें भगवान को जगदीश, परमात्मा, पालनकर्ता और भक्तों के रक्षक के रूप में प्रणाम किया गया है।

2. क्या ॐ जय जगदीश हरे आरती रोज गा सकते हैं?

हां। इसे प्रतिदिन सुबह या शाम की पूजा में गाया जा सकता है।

3. क्या सत्यनारायण पूजा में यह आरती गाई जाती है?

हां। सत्यनारायण भगवान विष्णु के ही एक पूजनीय स्वरूप हैं। इसलिए सत्यनारायण व्रत कथा और पूजा के बाद यह आरती सामान्य रूप से गाई जाती है।

4. क्या महिलाएं और बच्चे यह आरती गा सकते हैं?

हां। पुरुष, महिलाएं और बच्चे सभी श्रद्धापूर्वक यह आरती गा या सुन सकते हैं।

5. आरती में “तेरा तुझको अर्पण” का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि हमारा शरीर, मन, धन और जीवन भगवान का दिया हुआ है। इसलिए भक्त जो कुछ भगवान को अर्पित करता है, वह वास्तव में उन्हीं की वस्तु उन्हें समर्पित करता है।

6. क्या बिना पूजा सामग्री के आरती गा सकते हैं?

हां। दीपक, फूल और प्रसाद devotional वातावरण बनाने में सहायक हैं, लेकिन इनके बिना भी श्रद्धापूर्वक आरती गाई या सुनी जा सकती है।

7. आरती गाने में कितना समय लगता है?

सामान्य गति से पूरी आरती गाने में लगभग 5 से 8 मिनट लग सकते हैं। समय गायन की गति और पंक्तियों की पुनरावृत्ति पर निर्भर करता है।

8. क्या आरती रात में कर सकते हैं?

हां। इसे सायंकालीन पूजा या सोने से पहले भी गाया जा सकता है। दीपक का उपयोग करते समय सुरक्षा का ध्यान रखें।

निष्कर्ष

“ॐ जय जगदीश हरे” भगवान विष्णु के प्रति विश्वास, विनम्रता और पूर्ण समर्पण व्यक्त करने वाली सरल तथा भावपूर्ण आरती है। इसमें भक्त भगवान से केवल सुख और संकट-मुक्ति की प्रार्थना नहीं करता, बल्कि अपने दोषों को दूर करने, श्रद्धा बढ़ाने और सेवा-भाव प्रदान करने की भी प्रार्थना करता है।

नियमित पूजा, सत्यनारायण कथा, एकादशी या पारिवारिक भजन के समय इसे श्रद्धापूर्वक गाया जा सकता है।

ॐ नमो नारायणाय। श्रीहरि विष्णु भगवान की जय।

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